नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत जमींदोज होने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत के बाद राजधानी में अवैध निर्माण, मानक विहीन निर्माण और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कड़ा रुख अपनाते हुए दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त (DC) राकेश कुमार और चार इंजीनियरों को अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित रहने तक तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
MCD के सर्वे पर उठे सवाल: 27 लाख इमारतों में सिर्फ 19 खतरनाक?
हादसे के बाद मानसून से पहले MCD द्वारा किए जाने वाले इमारतों के सर्वे की पोल खुल गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में निगम ने 27,84,286 इमारतों की जांच की थी, जिनमें से हैरान करने वाले रूप से केवल 19 इमारतों को ही ‘खतरनाक’ घोषित किया गया था। अधिकारियों ने माना कि सर्वे केवल ऊपरी रूप से दरारों और झुकी दीवारों को देखकर किया जाता है, इमारतों की कोई विस्तृत स्ट्रक्चरल ऑडिट (संरचनात्मक जांच) नहीं होती है।
बिना स्वीकृत नक्शे के 55 गज के प्लॉट पर बनी थी 5 मंजिला इमारत
दस्तावेजों के अनुसार, ढही हुई इमारत 1990 के दशक में (स्थानीय दावों के मुताबिक 1970 के दशक में) पुनर्वास कॉलोनी के महज 55 वर्ग गज के प्लॉट पर बनाई गई थी। इन कॉलोनियों में शुरुआत में केवल ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर के निर्माण की ही अनुमति थी। इसके बावजूद बिना किसी पास नक्शे के 5 मंजिला इमारत खड़ी कर लड़कों के PG के रूप में चलाई जा रही थी। यद्यपि मालिक ने प्रॉपर्टी टैक्स और वर्ष 2007 में कन्वर्जन चार्ज जमा किया था, लेकिन इससे निर्माण की वैधता प्रमाणित नहीं होती।
बेसमेंट में काम और जमा पानी बना हादसे का कारण!
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि बेसमेंट में चल रहे मरम्मत कार्य और जमा पानी के कारण इमारत की नींव कमजोर हो गई थी। MCD कमिश्नर संजीव खिरवार ने बताया कि हादसे की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। एहतियात के तौर पर पास की एक अन्य इमारत (लड़कियों का PG) को खाली कराकर सील कर दिया गया है। इसके अलावा दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 349 के तहत आसपास की 4 अन्य संपत्तियों को खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं।
महीनों में 980 अवैध संपत्तियों पर चला बुलडोजर, फिर भी जारी लापरवाही
निगम के आंकड़ों के मुताबिक, जून से सितंबर के बीच MCD ने 980 अवैध संपत्तियों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की और 460 संपत्तियां सील कीं। इस दौरान 1,500 से अधिक कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे। हालांकि, दक्षिण दिल्ली के सैदुल अजायब और हौज रानी जैसी घटनाओं के बाद सत्य निकेतन का यह हादसा साबित करता है कि शहर में बड़े पैमाने पर पुरानी और अवैध इमारतों की अनदेखी हो रही है।
















