कानपुर। फर्जी दस्तावेजों के दम पर अदालत को गुमराह करने और कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ कानपुर पुलिस कमिश्नरेट को बड़ी सफलता मिली है। साल 2020 से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी अपराधी शिवम शर्मा को पूर्वी जोन की पुलिस टीम ने लखनऊ से धर दबोचा। आरोपी लंबे समय से अपनी पहचान छिपाकर पुलिस को चकमा दे रहा था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
लखनऊ से पकड़ा गया गिरोह का शातिर मोहरा
पकड़ा गया शातिर शिवम शर्मा मूल रूप से लखनऊ के बाजारखाला थाना क्षेत्र स्थित ऐशबाग, मिल रोड का निवासी है। उसके खिलाफ कानपुर के कोतवाली थाने में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने (कूटरचना) और आपराधिक षड्यंत्र रचने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज था। लगातार फरार चलने के कारण पुलिस प्रशासन ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। अपर पुलिस उपायुक्त (पूर्वी) शिवा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस टीम काफी समय से इसके ठिकानों पर नजर बनाए हुए थी और सटीक सूचना के आधार पर इसे लखनऊ से गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल हुई।
गैंगस्टर कोर्ट के लिपिक की शिकायत पर दर्ज हुआ था मामला
पुलिस जांच में इस बात का सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आरोपी शिवम वर्ष 2010 में जीआरपी कानपुर में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के एक मामले में जेल गया था। जेल से बाहर आने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर एक संगठित साजिश रची। उसने फर्जी और कूटचित जमानत प्रपत्र तैयार करवाए और उन्हें असली बताकर अदालत में प्रस्तुत कर दिया। फर्जी कागजातों के आधार पर उसने जमानत भी हासिल कर ली। इस धांधली की भनक लगते ही गैंगस्टर कोर्ट के लिपिक की तहरीर पर वर्ष 2020 में कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया गया था, जिसके बाद से ही आरोपी फरार चल रहा था।
36 से ज्यादा मुकदमे दर्ज, जीआरपी कानपुर का हिस्ट्रीशीटर है आरोपी
शिवम शर्मा कोई आम अपराधी नहीं है, बल्कि उस पर अपराध का एक लंबा-चौड़ा इतिहास दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ कानपुर, आगरा, लखनऊ, जीआरपी कानपुर, जीआरपी झांसी और जीआरपी वाराणसी के विभिन्न थानों में चोरी, लूट, धोखाधड़ी और अन्य संगीन अपराधों के करीब तीन दर्जन (36) मुकदमे दर्ज हैं। जीआरपी कानपुर द्वारा उसे बाकायदा हिस्ट्रीशीटर भी घोषित किया जा चुका है।
गिरोह के 80 सदस्य जा चुके हैं जेल, 22 अन्य संदिग्ध पुलिस रडार पर
अपर पुलिस उपायुक्त ने बताया कि कड़ाई से की गई पूछताछ में आरोपी ने फर्जी जमानत नेटवर्क से जुड़े कई अन्य अहम नामों का खुलासा किया है। यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपराधियों की जमानत कराने का एक पूरा सिंडिकेट चला रहा था। इस फर्जी जमानत प्रकरण में पुलिस अब तक करीब 80 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है। फिलहाल पूछताछ से मिली नई जानकारियों के आधार पर 22 अन्य संदिग्ध पुलिस की रडार पर हैं, जिनकी तलाश में पुलिस टीम लगातार छापेमारी कर रही है।









