
भास्कर समाचार सेवा
मुंडाली। सरकार ने आवारा घूम रहे पशुओं को लेकर बड़ा आदेश जारी किया हुआ है। गांवों और शहरों के साथ ही आस-पास घूमने वाले निराश्रित पशुओं को आश्रय मिलने के बाद प्रदेश के चार लाख निराश्रित पशुओं को हर हाल में आश्रय स्थलों में पहुंचाने के कड़े निर्देश दिए हुए हैं।
एक तरफ जहां सरकार ने हर ग्राम पंचायत में कम से कम दस पशुओं को आश्रय दिलाने और शहरों में घूम रहे शत प्रतिशत पशुओं को पकड़ने का आदेश दिया हुआ है। वही देहात क्षेत्र में आवारा पशु बहुत समय से लोगों की मुसीबत का सबब बने हुए हैं। इन दिनों इस समस्या ने क्षेत्र के अनेक गांवों में भी पैर पसार लिया है। हालांकि आवारा जानवरों की समस्या किसी एक इलाके की नहीं, पूरे जिले की है। क्षेत्र में अधिकांश कम जमीन वाले किसान हैं और जानवरों को रोकने के लिए कंटीले तार लगाना बेहद खर्चीला काम है। क्षेत्र में गो आश्रय स्थल खुलने के बाद भी किसानों को आवारा पशुओं से राहत नहीं मिल पा रही है। रबी के सीजन में खेतों में गेहूं, आलू, मटर, सरसों, अरहर आदि की फसलें लहलहा रही हैं। आवारा पशुओं से पहले किसान जंगली जानवरों से परेशान रहते थे लेकिन, अब जंगली जानवरों के साथ-साथ आवारा मवेशियों ने भी किसानों को चिंता डाला हुआ है। एक तरफ जहां जिले के सभी विकास खंड क्षेत्रों में आवारा पशुओं को रखने के लिए गो आश्रय केंद्र खोले हुए हैं। इसके बाद भी गांव के खेत खलिहान में आवारा पशु घूमते रहते हैं। खेतों में तैयार होने से पहले ही ये मवेशी फसल नष्ट कर रहे हैं।
झुंड में आकर करते हैं फसल बर्बाद
गेहूं की बोआई के होते ही झुंड में जाकर आवारा पशु उसे खाने के साथ ही पैरों से कुचलकर बर्बाद कर रहे हैं। किसान जानवरों को खदेड़कर अपने खेतों से निकालते हैं लेकिन, वे फिर वापस आ जाते हैं। इसके अलावा खेत में किसान रतजगा कर रहे हैं। किसानों को आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए कोई तरकीब नहीं सूझ रही है।
इन गांवों में बनी है समस्या, किसान ये बोले
क्षेत्र के कलवा, इदरीस, राशिद शाकर, सलमान, मुजीब अंजार, आशिफ फुरकत आदि किसानों ने बताया, फसल को पहले जंगली जानवरों से बचाना पड़ता था, लेकिन अब आवारा पशुओं से सुरक्षा करनी पड़ रही है। आवारा पशु किसानों की खून पसीने की कमाई को नष्ट कर रहें हैं। किसान अपने खेतों में पहरेदारी करने के बाद भी अपनी फसलों को नहीं बचा पा रहे हैं। क्षेत्र के अजराड़ा, मुंडाली, जिसोरी, जिसोरा, एलोटी, अटौला, समयपुर, सिसौली आदि सभी गावों में यह समस्या बनी है।














