
प्रयागराज। कुख्यात माफिया अतीक अहमद और उनके छोटे भाई अशरफ की पुलिस अभिरक्षा में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए रात्रि लगभग साढे दस बजे मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय ले जाया गया। इसी दौरान मीडिया कर्मी बनकर आये तीन पेशेवर अपराधियों ने गोलियों से भूनकर हत्या कर दी। मौके ए वारदात से दबोचे गये तीनों हत्यारों को आज सीजेएम कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें चार दिन की पुलिस रिमांड दी गई।
पुलिस माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या करने वाले तीनों शूटरों को लेकर सीजीएम कोर्ट लेकर पहुंची। माफिया अतीक और अशरफ की ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर हत्या करने वाले शूटर लवलेश तिवारी, सनी सिंह और अरुण मौर्य को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में पेशी के लिए सीजेएम कोर्ट लाया गया। पुलिस की रिमांड अर्जी पर कोर्ट में सुनवाई हुई। पुलिस ने तीनों शूटरों की 14 दिन की रिमांड मांगी है। लेकिन कोर्ट ने तीनों शूटरों की चार दिन की पुलिस रिमांड मंजूर की। कोर्ट ने आरोपियों को रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस की टीम ने आरोपियों से पूछताछ के लिए 100 से ज्यादा सवाल तैयार किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों से मोबाइल और हथियार को लेकर सवाल होंगे। पुलिस की टीम क्राइम सीन रिक्रिएट कर सकती है। बता दें कि अतीक के गुर्गों के खौफ के कारण आरोपियों को नैनी जेल से सोमवार को ही प्रतापगढ़ भेजा गया था। शूटरों को कचहरी तक लाए जाने के दौरान पूरे रास्ते चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात रहे। कचहरी छावनी में तब्दील है। जांच एजेंसियों के साथ-साथ आरएएफ और पीएसी के जवानों की तैनाती है।
रिमांड मिलने के बाद खुलेगा माफिया भाइयों की हत्या का राज
प्रयागराज। पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद और उसके भाई पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ अशरफ की हत्या का सच जल्द ही सामने आ सकता है। कोर्ट से रिमांड मिलने के बाद एसआईटी उससे हत्या के राज उगलवाएगी। मसलन हत्या क्यों की, किसके ईशारे पर की, किसने साजिश रची, किसने सुपारी दी और किसने इतने महंगे असलहे उपलब्ध कराए आदि सवालों के जवाब एसटीएफ इन आरोपियों से उगलवाएगी। सूत्रों ने बताया कि तीनों की पारिवारिक दशा और पृष्ठभूमि देखकर यह कहीं से नहीं यकीन हो रहा है इन लोगों ने महज सस्ती लोकप्रियता के लिए माफिया बंधुओं की हत्या की होगी।
जैसा की आरोपियों ने कथित तौर पर खुद स्वीकार किया है कि वह जरायम की दुनिया में अपना नाम कमाना चाहते थे इसलिए उन्होंने सबसे बड़े माफिया का खात्मा किया है। उनकी इस थ्योरी पर एकबारगी किसी को यकीन नहीं हो रहा है। बात वहीं आकर रुक जा रही है कि जिसके पास दो जून की रोटी का जुगाड़ न हो और परिवार की दशा खस्ताहाल हो। और जिसकी आमदनी का कोई जरिया न हो वह लाखों रुपये की कीमत वाले विदेश में निर्मित और भारत में प्रतिबंधित जिगाना पिस्टल कहां से पाएगा। हत्या के पीछे का सच बस कुछ ही दिनों में सबसे सामने आ सकता है।











