हीट वेव से बिगड़ सकता है स्वास्थ्य, जानिए ऐसे मौसम में क्या करें, क्या न करें

-विशेषज्ञों ने सूरज के सीधे संपर्क से बचने की दी सलाह

-बचाव के लिए खूब पानी पिएं, ठंडक प्रदान करने वाले फल खाएं

वाराणसी (हि.स.)। अप्रैल माह के तीसरे सप्ताह में तापमान बहुत तेजी से बढ़ा है। पूर्वाह्न के 10 बजते-बजते सूरज के तेवर बहुत सख्त हो जा रहे हैं। विशेषज्ञ सूरज के सीधे सम्पर्क में ज्यादा देर तक नहीं रहने, पानी पीते रहने और फलों का सेवन बढ़ाने की सलाह दे रहे हैं।

सूरज उगने के कुछ देर बाद से ही गर्मी अपना प्रकोप दिखाने लग रही है। दोपहर में हीटवेव (लू) भी चल रही है। ऐसे मौसम में बच्चों से लेकर वृद्धजन बेहाल हैं। लोग बेहोशी, मांसपेशियों में जकड़न, मिर्गी दौरा पड़ना, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द, अधिक पसीना आना, कमजोरी, चक्कर आना, सांस व दिल की धड़कन तेज होना, मतली और उल्टी आना, नींद पूरी न होने की समस्या से जूझ रहे हैं। मौसम के तल्ख तेवर को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को लू से बचने के लिए सलाह दी है। खानपान से लेकर आवाजाही करने में विशेष सतर्कता बरतने को कहा है।

बुधवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि अचानक से तापमान में बढ़ोत्तरी हुई है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। लू और अधिक गर्मी को देखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अप्रैल से जून तक लू और गर्मी का प्रकोप रहता है। तापमान भी 42 डिग्री सेल्सियस से लेकर 46 डिग्री तक पहुँच जाने का अनुमान है। जरा सी असावधानी और लापरवाही बरतने से कोई भी लू की चपेट में आ सकता है।

एसीएमओ व नोडल अधिकारी डॉ. राजेश प्रसाद ने बताया कि हीट वेव से संबन्धित लक्षण जैसे अधिक पसीना आना, शारीरिक तापमान 105 फारेनहाइट या उससे अधिक, उल्टी आना, बेहोशी आना, थकान, कमजोरी, चक्कर आना, मांसपेशियों में जकड़न, सिरदर्द आदि हैं। यदि ऐसे लक्षण लगातार देखने को मिल रहे हैं तो ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। जिले के सभी चिकित्सालयों और स्वास्थ्य केन्द्रों में पर्याप्त मात्रा में ओआरएस पाउडर, आईवी फ्ल्यूड की उपलब्ध है। सभी तरह की दवाएं उपलब्ध हैं।

ऐसे मौसम में क्या करें

गर्मी से बचने के लिए अधिक से अधिक पानी पिएं। यदि प्यास न लगी हो तब भी पानी पिएं, ओआरएस घोल लेते रहें, घर में बने हुए पेय पदार्थ जैसे लस्सी, चावल का पानी (माड़), नींबू, पानी, छाछ आदि का अधिक से अधिक उपयोग करें। इससे शरीर में पानी की कमी की भरपाई हो सकेगी। जल की अधिक मात्रा वाले मौसमी फल तरबूज, खरबूजा, संतरे, अंगूर, अनानास एवं सब्जी, खीरा, ककड़ी, सलाद पत्ता का प्रयोग करें। हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें। धूप के चश्में, छाता, टोपी का प्रयोग करें।

क्या न करें

दिन के 12 से तीन बजे तक हो सके तो धूप में न निकलें। सूरज के सीधे संपर्क में आने से बचें। अधिक प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के प्रयोग से यथासंभव बचें। बासी भोजन का प्रयोग न करें। बच्चों, वृद्धजनों तथा पालतू जानवरों को खड़ी व बंद गाड़ियों में न छोड़ें। अधिक गर्मी वाले समय में खाना बनाने से बचें, शराब, मांस-मछली, कार्बोनेटेड ड्रिंक आदि के उपयोग करने से बचें।

हीट स्ट्रोक आने पर प्राथमिक उपचार

यदि कोई गर्मी की चपेट में आ गया तो पीड़ित व्यक्ति को ठंडे एवं छायादार स्थान पर ले जाएं। एंबुलेंस को 108 नंबर पर फोन करें एवं नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाएं। व्यक्ति को पैर ऊपर रखकर सुलाएं। अगर बेहोश न हो तो ठंडा पानी पिलाएं। जितना हो सके कपड़े शरीर से निकाल दें। शरीर के ऊपर पानी से स्प्रे करें। ओआरएस का घोल पिलाएं। शरीर पर गीला कपड़ा या स्पंज रखें। पंखे से शरीर पर हवा डालें। सिर पर गीले कपड़े से सिकाई करें।

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