रचा इतिहास : सफलतापूर्वक लॉन्च की गई गगनयान मिशन की टेस्ट फ्लाइट, जानिए इससे जुड़ा हर अपडेट

Gaganyaan Mission: इसरो ने गगनयान मिशन की टेस्ट फ्लाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। आपको बता दें कि इसके बाद कई और टेस्ट फ्लाइट की लॉन्चिंग की जाएगी और उसके बाद मानव को स्पेस में भेजने के लिए इसरो अपनी तैयारी शुरू कर देगा। इसरो चीफ डॉ. सोमनाथ ने कहा है कि यदि इन चरणों में फेल होने का एहसास होता है तो गगनयान मिशन की समय सीमा बढ़ाई भी जा सकती है।


साल 2025 में इंसानों को अंतरिक्ष में भेज सकता है इसरो
चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर उतरने के दो महीने से भी कम समय बाद शनिवार को, इसरो ने संभावित रूप से 2025 में भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने के उद्देश्य से प्रणालियों और प्रक्रियाओं की श्रृंखला का पहला परीक्षण किया।

आपको बता दें कि टेस्ट फ्लाइट 17 किमी की ऊंचाई तक जाएगी और फिर एबॉर्ट सिग्नल एक्टिवेट हो जाएगा, जिसके बाद क्रू मॉड्यूल को अलग किया जाएगा जो पैराशूट के जरिए बंगाल की खाड़ी में उतरेगा। यह पूरा परीक्षण कुल 532 सेकेंड यानी 8.7 मिनट में पूरा किया जाएगा। आपको बता दें कि इस पूरी परीक्षण के दौरान क्रू मॉड्यूल खाली रहेगा।

क्या है गगनयान मिशन?
डॉ. सोमनाथ ने कहा है कि हम जल्दबाजी नहीं करना चाहते। ह्यूमन स्पेस फ्लाइट का प्राथमिक उद्देश्य एक सुरक्षित मिशन है। हमने इसे इस तरह से फिर से परिभाषित किया है कि हम पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर लेंगे।

आपको बता दें कि 21 अक्टूबर को TV-D1 टेस्ट फ्लाइट के बाद गगनयान कार्यक्रम के तहत तीन और परीक्षण D2, D3 और D4 की प्लानिंग की है। क्रू मॉड्यूल, जिसमें तीनों अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष के लिए रवाना होंगे, 3.7 मीटर व्यास और सात मीटर ऊंचाई का बना होगा। मानव अंतरिक्ष उड़ान को कक्षा तक पहुंचने में 16 मिनट लगेंगे जहां वह पांच से सात दिनों तक रहेगा। यह कैप्सूल हर 90 मिनट में पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाएगा और अंतरिक्ष यात्री सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकेंगे। तीनों अंतरिक्ष यात्री सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण पर प्रयोग करते हुए हर 24 घंटे में अंतरिक्ष से भारत को देख सकेंगे। वापसी में कैप्सूल को 36 घंटे लगेंगे और यह गुजरात के तट से कुछ दूर अरब सागर में उतरेगा।

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