पंजाब विधानसभा चुनाव 2027: पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बीजेपी का ‘मिशन पंजाब’, क्या काम आएगा ‘बंगाल मॉडल’?

चंडीगढ़/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में शून्य से शिखर तक का सफर तय करने वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) अब पंजाब की राजनीतिक जमीन पर वैसा ही करिश्मा दोहराने की तैयारी में है। 2027 की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए बिसात बिछ चुकी है। पंजाब को छोड़कर बाकी चुनावी राज्यों (यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर) में सत्तासीन बीजेपी के लिए ‘सफेद सोने’ की धरती (पंजाब) इस बार सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता बनी हुई है।

आम आदमी पार्टी (AAP) का संकट: क्या बिखर जाएगा संगठन?

2022 में ऐतिहासिक बहुमत के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी के लिए मौजूदा हालात ‘अस्तित्व की लड़ाई’ जैसे बन गए हैं। दिल्ली में सत्ता गंवाने के बाद पंजाब ही ‘आप’ का आखिरी मजबूत किला है, लेकिन यहां भी संकट गहरा है:

  • दलबदल की मार: ‘आप’ के 7 राज्यसभा सांसदों का बीजेपी में जाना पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका है।

  • रणनीतिकारों का हमला: कभी पार्टी की रीढ़ रहे राघव चड्ढा और संदीप पाठक अब बीजेपी के पाले में हैं और लगातार ‘आप’ के संगठनात्मक ढांचे पर प्रहार कर रहे हैं।

  • ई़डी और गुटबाजी: भ्रष्टाचार के आरोप, मंत्रियों पर शिकंजा और अंदरूनी गुटबाजी विधायकों को एकजुट रखने में बड़ी बाधा बन सकती है।

क्या होगा बीजेपी का ‘पंजाब मॉडल’?

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने ममता सरकार को ‘तुष्टिकरण’ और ‘भ्रष्टाचार’ पर घेरा था। पंजाब में भी पार्टी कुछ वैसी ही आक्रामक रणनीति अपना रही है:

  1. कानून-व्यवस्था और नशा: भगवंत मान सरकार को कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर घेरने के साथ-साथ बीजेपी ‘नशे की समस्या’ को एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है।

  2. महिला कार्ड: बंगाल की तरह यहां भी बीजेपी महिलाओं से किए गए उन वादों को याद दिला रही है जो ‘आप’ ने पिछले चुनाव में किए थे लेकिन पूरे नहीं हुए।

  3. स्थानीय मुद्दों पर जोर: बिजली, पानी और स्थानीय प्रशासन में भ्रष्टाचार को लेकर बीजेपी ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

अकाली दल से फिर होगा गठबंधन?

6 साल पहले कृषि कानूनों के मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी की पुरानी दोस्ती टूट गई थी। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी साथ आने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन गठबंधन नहीं हो पाया।

  • अकेले चलने की तैयारी: फिलहाल दोनों दल सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का दावा कर रहे हैं।

  • संभावनाओं के द्वार: राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ‘आप’ और कांग्रेस को रोकना है, तो चुनाव से ऐन पहले पुराने सहयोगियों के बीच फिर से समझौता हो सकता है।

चुनौतियां अभी कम नहीं हैं

भले ही बीजेपी बंगाल मॉडल अपना रही है, लेकिन पंजाब की राह कठिन है। कृषि कानूनों के कारण ग्रामीण इलाकों में जो नाराजगी उपजी थी, उसे पूरी तरह खत्म करना अभी बाकी है। बीजेपी को यह साबित करना होगा कि वह केवल शहरों की नहीं, बल्कि किसानों और गांव की भी पार्टी है। पंजाब से आए नए नेताओं की मदद से बीजेपी अपनी छवि बदलने और जनाधार बढ़ाने की कोशिश में जुटी है।

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