विशेषज्ञों की चेतावनी : सिर्फ दवाओं से मिर्गी पूरी तरह नियंत्रित नहीं होती

नई दिल्ली । हैल्थ विशेषज्ञों की माने तो मिर्गी एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जो मस्तिष्क की कार्य प्रणाली को प्रभावित करता है। इस बीमारी के दौरे अचानक पड़ते हैं, जिससे मरीज और उसके परिवार दोनों को शारीरिक और मानसिक तनाव झेलना पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ दवाओं से मिर्गी पूरी तरह नियंत्रित नहीं होती, बल्कि मानसिक शांति और नियमित जीवनशैली भी इसके नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस दिशा में योग बेहद उपयोगी माना गया है, क्योंकि यह न केवल शरीर को लचीला बनाता है बल्कि मस्तिष्क और नर्वस सिस्टम को भी शांत करता है। मिर्गी के मरीजों के लिए उत्तानासन एक बेहद लाभकारी योगासन है।

यह आसन कंधे, कमर और पैरों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है, जिससे शरीर में लचीलापन आता है और मस्तिष्क को शांति मिलती है। नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता कम होती है, जिससे मिर्गी के दौरे आने की संभावना घटती है।

इसी तरह हलासन का अभ्यास नर्वस सिस्टम को शांत करता है और मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। यह आसन शरीर की नसों और मांसपेशियों की अकड़न को दूर करता है और साथ ही कमर व गर्दन के दर्द में राहत देता है। शवासन मस्तिष्क और शरीर को पूर्ण विश्राम देने वाला आसन माना जाता है। इसका नियमित अभ्यास तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं को दूर करता है और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखता है। मिर्गी के मरीजों में यह आसन विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि तनाव और मानसिक अशांति दौरे को बढ़ा सकती है। बालासन भी एक सरल और प्रभावी योगासन है जो मानसिक तनाव को कम करने में मदद करता है। यह दिमाग को शांत कर ऊर्जा का बेहतर प्रवाह सुनिश्चित करता है, जिससे मिर्गी के मरीजों को मानसिक स्थिरता मिलती है।

वहीं, मत्स्यासन मस्तिष्क और शरीर के बीच तालमेल को बेहतर बनाता है। इस आसन से अपर बॉडी की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग होती है, जिससे तनाव कम होता है और मस्तिष्क अधिक सक्रिय और शांत रहता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि नियमित योगाभ्यास मिर्गी के दौरे की आवृत्ति को कम कर सकता है और मरीज के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। मिर्गी के उपचार में दवाओं के साथ योग और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, जिससे मरीज अधिक संतुलित और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। मालूम हो कि हर साल नवंबर माह को राष्ट्रीय मिर्गी जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों में मिर्गी यानी एपिलेप्सी के प्रति जागरूकता और समझ बढ़ाना है।

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