जिंदा होकर भी कागजों में मृत: पेंशन के लिए बुजुर्ग को 3 साल तक लगाने पड़े चक्कर…अब मिलेगा हक

-जिलाधिकारी ने बताया कि पेंशन बहाल की जा रही है

उरई । उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में प्रशासनिक लापरवाही और उदासीनता का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कोंच तहसील के भरसूड़ा गांव निवासी एक वृद्ध पेंशनधारी को अधिकारियों ने अपने रिकॉर्ड में गलती से मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद उसकी पेंशन रोक दी गई। पिछले तीन वर्षों से इस बुजुर्ग अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहा था। आज जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि पेंशन बहाल की जा रही है।

जिले के भरसूड़ा गांव के 66 वर्षीय बुजुर्ग जगदेव सिंह वृद्धावस्था पेंशन के हकदार थे और नियमित रूप से पेंशन प्राप्त कर रहे थे। लगभग तीन साल पहले अचानक उनकी पेंशन आनी बंद हो गई। जब उन्होंने इसकी जांच कराई तो पता चला कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में उन्हें गलती से मृत घोषित कर दिया गया है। विभाग की इस गलती के कारण उनके पेंशन खाते को फ्रीज कर दिया गया। इस गलती को सुधारने और अपनी पेंशन बहाल कराने के लिए जगदेव सिंह और उनके परिवार ने गांव से लेकर तहसील और जिला स्तर तक के कार्यालयों का दर-दर भटकना शुरू किया। हर जगह उन्हें फाइल आगे बढ़ाने, शिकायत दर्ज कराने और सबूत पेश करने के बाद भी निराशा ही हाथ लगी। अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और मामला लटकता रहा। थक-हारकर और न्याय की उम्मीद लेकर, जगदेव सिंह आज सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने जिलाधिकारी को स्थिति से अवगत कराया।

मंगलवार को शिकायती पत्र देते हुए बुजुर्ग के पुत्र रविन्द्र कुमार ने कहा, यह सरकारी उदासीनता है। मेरे पिता जीवित हैं और सबूत के तौर पर यहां खड़े हैं, फिर भी उन्हें तीन साल से साबित करना पड़ रहा है कि वो जिंदा हैं। आज जिलाधिकारी कार्यालय आए पीड़ित बुजुर्ग ने बताया कि मैं तीन साल से दफ्तर-दफ्तर भटक रहा हूं। सब कहते हैं गलती हो गई, सुधार देंगे, लेकिन कुछ नहीं होता। पेंशन बंद है। मैं जिंदा हूं, ये साबित करने के लिए मुझे कितना भटकना पड़ेगा। इस बाबत पूछे जाने पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि आवेदन पत्र की जांच करते हुए संबंधित विभाग काेे निर्देशित किया गया है और ​बुजुर्ग की पेंशन को फिर से शुरु की जा रही है।

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