
नई दिल्ली। पिछले कई दिनों से चल रही बर्फीली और तेज हवाओं ने दिल्ली-एनसीआर के निवासियों को बड़ी सौगात दी है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का काला साया छंटने लगा है और हवा की गुणवत्ता में जबरदस्त सुधार दर्ज किया गया है। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के अधिकांश इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अब ‘मध्यम’ श्रेणी यानी यलो जोन में पहुंच गया है। लंबे समय बाद एनसीआर के लोग जहरीले स्मॉग से मुक्त होकर अपेक्षाकृत स्वच्छ हवा में सांस ले पा रहे हैं।
प्रदूषण से मिली आजादी: आनंद विहार को छोड़ हर तरफ ‘यलो जोन’
वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों के ताजा आंकड़ों ने राहत की तस्वीर पेश की है। दिल्ली के अलीपुर में AQI 155, अशोक विहार में 149 और आया नगर में 135 दर्ज किया गया। घने रिहाइशी इलाकों जैसे बवाना (160) और बुराड़ी क्रॉसिंग (132) में भी हवा काफी साफ रही। हालांकि, आनंद विहार (229) अब भी ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है, लेकिन चांदनी चौक (181) जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी सुधार दिख रहा है।
नोएडा और गाजियाबाद की बात करें तो वहां भी स्थिति सुखद है। नोएडा के सेक्टर-62 और 116 में AQI 141 से 160 के बीच रहा। गाजियाबाद के वसुंधरा और इंदिरापुरम में भी सुधार है, लेकिन लोनी क्षेत्र (213) में प्रदूषण अब भी थोड़ा परेशान कर रहा है।
मौसम का मिजाज: होली से पहले ‘वसंत’ की विदाई और गर्मी की दस्तक
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, तेज हवाओं ने प्रदूषक कणों को छितरा तो दिया है, लेकिन अब तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होने वाली है। यानी प्रदूषण से राहत मिलते ही अब गर्मी अपना रंग दिखाएगी।
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6 मार्च: अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है।
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8 मार्च: न्यूनतम तापमान भी बढ़कर 17 डिग्री हो जाएगा, जिससे रातें भी गर्म होने लगेंगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में आसमान पूरी तरह साफ रहेगा और तेज धूप के कारण वसंत ऋतु की विदाई का अहसास होगा। फिलहाल मौसम विभाग ने किसी भी तरह की चेतावनी जारी नहीं की है, जो होली की तैयारियों में जुटे लोगों के लिए अच्छी खबर है।
क्यों साफ हुई हवा? विशेषज्ञों की राय
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, हवा की गति तेज होने के कारण वातावरण में प्रदूषक तत्व टिक नहीं पाए। आमतौर पर दिल्ली में हवा थमने से प्रदूषण का जमाव (Accumulation) होता है, लेकिन पिछले 3-4 दिनों की तेज हवाओं ने ‘नेचुरल क्लीनिंग’ का काम किया है। इससे न केवल दृश्यता (Visibility) बढ़ी है, बल्कि सांस के मरीजों को भी बड़ी राहत मिली है।














