तेहरान/वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण संघर्ष के बीच अब समुद्र का सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) जंग का अखाड़ा बन गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह इस संकरे समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किसे करने देगा और किसके लिए दरवाजे बंद रखेगा। ईरानी विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यह मार्ग केवल ईरान के दुश्मनों और हमलावर देशों के लिए बंद है, बाकी दुनिया के लिए व्यापार सामान्य रूप से जारी रह सकता है।
ईरान का रुख: ‘सुरक्षा चिंता’ या दुश्मनों की घेराबंदी?
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, “बाकी देशों के जहाज यहां से सामान्य रूप से गुजर सकते हैं, लेकिन जो देश ईरान पर हमला कर रहे हैं या जो हमारे घोषित दुश्मन हैं, उनके जहाजों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति कतई नहीं दी जाएगी।” अराघची का यह बयान ऐसे समय आया है जब ओमान और फारस की खाड़ी के बीच सैकड़ों व्यापारिक जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें कई भारतीय मालवाहक जहाज भी शामिल हैं। हालांकि, ईरान ने जहाजों के फंसने का ठीकरा सुरक्षा कारणों और खुद शिपिंग कंपनियों के फैसलों पर फोड़ दिया है।

ट्रंप का ग्लोबल ‘कॉल’: चीन और ब्रिटेन से मांगी मदद
ईरान की इस घेराबंदी के जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एकजुट होने की अपील की है। ट्रंप ने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसी प्रमुख शक्तियों से अपने युद्धपोत होर्मुज में तैनात करने को कहा है। ट्रंप का तर्क है कि चूंकि इन देशों का व्यापार इस रुकावट से सीधे प्रभावित हो रहा है, इसलिए उन्हें अमेरिका के साथ मिलकर इस जलमार्ग को ‘सुरक्षित और आजाद’ रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को पहले ही काफी हद तक तबाह कर चुका है, लेकिन ईरान अभी भी माइन बिछाने या ड्रोन हमलों जैसी ‘बनावटी रुकावटें’ पैदा करने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का संकट सीधे तौर पर भारत की रसोई और अर्थव्यवस्था पर चोट कर रहा है। भारत अपनी एलपीजी (LPG) और कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। वर्तमान में कई भारतीय जहाज इस संकरे मार्ग में फंसे हुए हैं, जिससे देश के भीतर गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने का डर सता रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि अगर ईरान इस जलमार्ग को बंद करने की कोशिश जारी रखता है, तो अमेरिका अपनी और मित्र देशों की नौसेना के जरिए जल्द ही इस रास्ते को ‘आजाद’ करा लेगा।












