ट्रंप का ‘टैरिफ वार’: यूरोपीय कारों पर 25% टैक्स का एलान, ईरान के शांति प्रस्ताव को भी दिखाया ठेंगा

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति को आक्रामक तरीके से लागू करते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था में खलबली मचा दी है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस से निकलते समय ट्रंप ने घोषणा की कि वह अगले सप्ताह से यूरोपीय संघ (EU) से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25% कर देंगे। व्यापारिक मोर्चे पर छिड़ी इस जंग के साथ-साथ ट्रंप ने पश्चिम एशिया के तनाव पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के नए शांति प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह इससे “संतुष्ट नहीं” हैं।

यूरोपीय ऑटो सेक्टर पर ‘टैरिफ स्ट्राइक’: जर्मनी को सबसे बड़ी चोट

राष्ट्रपति ट्रंप का यह फैसला पिछले साल हुए उस समझौते (Turnberry Agreement) को तोड़ता नजर आ रहा है, जिसमें यूरोपीय वाहनों पर शुल्क को 15% तक सीमित रखा गया था। ट्रंप का आरोप है कि यूरोपीय संघ समझौतों की शर्तों को लागू करने में सुस्ती बरत रहा है और अमेरिकी हितों की अनदेखी कर रहा है।

इस फैसले का सीधा असर जर्मनी पर पड़ेगा, जो यूरोप का सबसे बड़ा कार निर्यातक है। हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और ट्रंप के बीच रक्षा खर्च और यूक्रेन युद्ध को लेकर तीखी नोकझोंक हुई थी। ट्रंप ने दोटूक कहा कि अगर कंपनियां अमेरिका में कारें बनाती हैं तो उन पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, लेकिन बाहर से आने वाली गाड़ियों पर अब भारी जुर्माना देना होगा। इससे फॉक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी दिग्गज कंपनियों की लागत में भारी इजाफा होना तय है।

ईरान का ‘शांति ऑफर’ खारिज: ट्रंप बोले- हमें और बेहतर डील चाहिए

टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप ने ईरान की ओर से आए शांति प्रस्ताव पर भी पानी फेर दिया है। ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से युद्ध समाप्त करने और तनाव कम करने के लिए एक 10-सूत्रीय नया प्रस्ताव भेजा था। गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच पिछले तीन हफ्तों से एक अस्थिर युद्धविराम (Ceasefire) चल रहा है।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “वे (ईरान) समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उनका वर्तमान प्रस्ताव स्वीकार करने लायक नहीं है।” ट्रंप प्रशासन का मानना है कि जब तक ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह मुक्त नहीं करता और अपने परमाणु कार्यक्रम पर ठोस रियायतें नहीं देता, तब तक अमेरिका पीछे नहीं हटेगा। इस बीच, अमेरिका ने ईरान पर नए आर्थिक प्रतिबंध भी लगा दिए हैं।

वैश्विक असर: क्या फिर लौटेगा मंदी का साया?

एक्सपर्ट्स की मानें तो ट्रंप की इस ‘ट्रेड वॉर’ रणनीति से वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी। यदि यूरोपीय संघ जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी उत्पादों पर टैक्स बढ़ाता है, तो इससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ सकती है। कूटनीतिक स्तर पर, अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों (NATO) के बीच दरार और गहरी होने की आशंका है, जिसका सीधा फायदा प्रतिद्वंद्वी देशों को मिल सकता है।

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