सीतापुर की ऐतिहासिक हेनरी थॉमसन फैक्ट्री पर नया मोड़: ब्रिटिश वारिसों की तलाश के लिए उच्चायुक्त को लिखा पत्र, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

प्लाईवुड फैक्ट्री विवाद में अब ‘ब्रिटिश’ एंट्री, पूर्व पालिकाध्यक्ष ने हाई कमिश्नर को लिखा पत्र

हेनरी थॉमसन के वारिसों की तलाश के लिए ब्रिटिश उच्चायोग से मांगी मदद, थमेगी सरकारी कार्रवाई?

150 बीघा जमीन और हजारों मजदूरों का भविष्य दांव पर, आशीष मिश्रा बोले-‘अधिकारों की रक्षा जरूरी’

सीतापुर। शहर के हुसैनगंज मोहल्ले में स्थित एशिया की कभी शान रही प्लाईवुड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री (हेनरी थॉमसन प्लाईवुड प्रोडक्ट्स) का मामला अब अंतरराष्ट्रीय गलियारों तक पहुँच गया है। फैक्ट्री की बेशकीमती 150 बीघा जमीन को राज्य सरकार के राजस्व में दर्ज करने की प्रशासनिक कवायद के बीच, पूर्व पालिकाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष मिश्रा ने एक बड़ा दांव खेला है। उन्होंने भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त मिस लिंडी कैमरन को औपचारिक पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक संपत्ति के मूल ब्रिटिश मालिकों के उत्तराधिकारियों की खोज करने की मांग की है।

एशिया की दिग्गज फैक्ट्री और 25 साल का सन्नाटा
1939 में ब्रिटिश नागरिक मिस्टर हेनरी थॉमसन और उनकी बहनों द्वारा स्थापित यह फैक्ट्री कभी एशिया स्तर पर अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती थी। यहाँ का प्लाईवुड ऑस्ट्रेलिया से लेकर नेपाल तक निर्यात होता था और 1,000 से अधिक कर्मचारी तीन शिफ्टों में काम करते थे। 1987 में ब्रिटिश मालिकों के भारत छोड़ने के बाद से यह फैक्ट्री करीब 25 वर्षों से बंद पड़ी है। हाल ही में, 11 फरवरी 2026 को जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर इस भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की थी, जिसके लिए 30 दिनों का समय दिया गया था।

कानपुर की आपत्ति और ब्रिटिश वारिसों का पेच
एडवोकेट आशीष मिश्रा ने अपने पत्र में ब्रिटिश उच्चायोग से अनुरोध किया है कि वे अपने रिकॉर्ड और डेटाबेस के जरिए हेनरी थॉमसन के कानूनी वारिसों का पता लगाएं। उन्होंने तर्क दिया है कि जब तक असली ब्रिटिश उत्तराधिकारियों की पहचान नहीं हो जाती, तब तक उत्तर प्रदेश सरकार की किसी भी श्जबरनश् कार्रवाई को रोका जाना चाहिए। आशीष मिश्रा के अनुसार, इस संपत्ति पर कानपुर के कुछ लोगों ने दावेदारी की है, लेकिन मूल स्वामित्व ब्रिटिश नागरिकों का ही रहा है।

मजदूरों के हक और रोजगार की चिंता
आशीष मिश्रा ने पत्र में केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि उन हजारों पूर्व भारतीय कर्मचारियों के कल्याण का मुद्दा भी उठाया है जो इस फैक्ट्री से जुड़े थे। उनका मानना है कि यदि उचित स्वामित्व के साथ फैक्ट्री का पुनरुद्धार होता है, तो सीतापुर में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा और शहर की खोई हुई औद्योगिक शान वापस लौट आएगी। अब देखना यह है कि ब्रिटिश उच्चायोग इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या जिला प्रशासन इस नई आपत्ति के बाद अपनी कार्रवाई पर लगाम लगाता है।

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