– हैलट अस्पताल में अब मरीजों की निगरानी पूरी तरह हाई-टेक और एआई आधारित होगी
– विशेष बेड मरीज की हालत गंभीर होने से कई घंटे पहले ही अलर्ट जारी करेंगे
कानपुर। गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लाला लाजपत राय चिकित्सालय यानी हैलट अस्पताल में एआई तकनीक से लैस बेड लगाने की तैयारी है। स्मार्ट बेड मरीज की धड़कन और हर छोटे मूवमेंट की निगरानी के जरिए हालत बिगड़ने से पहले ही डॉक्टर और नर्स को अलर्ट भेज देंगे। स्मार्ट बेड से मरीजों को मिलने वाले इलाज की क्वालिटी में सुधार होगा, क्यों कि, अलर्ट मिलते ही डॉक्टर और नर्स समय रहते पहुंचकर जान बचाने में सक्षम होंगे। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एआई तकनीक का एक बड़ा और पहला कदम माना जा रहा है।
पहले चरण में 30 बेड लगाए जाएंगे
मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला ने बताया कि अस्पताल में दो नए वार्ड तैयार किए गए हैं, जहां शुरुआती चरण में कम से कम 30 बेड्स को इन एआई-स्मार्ट मैट्रेस से लैस किया जाएगा। ये बेड ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं और सीएसआर फंड के माध्यम से लगाया जा रहा है। हर स्मार्ट बेड की कीमत लगभग 5 लाख रुपये बताई जा रही है। ये बेड मैट्रेस के नीचे लगे पतले सेंसर शीट के जरिए काम करते हैं, जो बैलिस्टोकार्डियोग्राफी तकनीक से शरीर की सूक्ष्म कंपनों को पकड़ते हैं, जैसे हर धड़कन, सांस और बॉडी मूवमेंट। एआई एल्गोरिदम इन डेटा को प्रोसेस करके हार्ट रेट, रेस्पिरेशन रेट, ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन सैचुरेशन और अन्य महत्वपूर्ण विटल साइन्स की निरंतर मॉनिटरिंग करता है।
एआई मैट्रेस दो घंटे पहले भेजेगा अलर्ट
अस्पताल में अक्सर ‘कोड ब्लू’ की स्थिति आती है, जब मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाती है और सीपीआर जैसी आपात स्थिति बनती है। ऐसी स्थिति में सफलता दर सिर्फ 50 फीसदी तक रहती है, क्योंकि कई बार डॉक्टर या स्टाफ पहुंचने से पहले ही मरीज की जान चली जाती है। लेकिन इन स्मार्ट बेड्स से स्थिति बदल जाएगी। अगर मरीज के विटल पैरामीटर्स में कोई असामान्य बदलाव आता है, जैसे ब्लड प्रेशर गिरना या धड़कन अनियमित होना तो डॉक्टर और नर्स के मोबाइल, टैबलेट पर तुरंत ‘रेड लाइन’ अलर्ट और अलार्म बज जाएगा। यह अलर्ट दो घंटे या इससे अधिक पहले भी आ सकता है, जिससे समय पर इंटरवेंशन संभव हो जाएगा।
अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ पर कम होगा बोझ
यह तकनीक फिलहाल कुछ बड़े प्राइवेट अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही है, लेकिन सरकारी क्षेत्र में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज इस तकनीक को अपनाकर एक मिसाल कायम करने जा रहा है। ये बेड पल-पल की रिपोर्ट जेनरेट करते हैं, जिससे हर समय एक अटेंडेंट या डॉक्टर के पास रहने की जरूरत कम हो जाती है। इससे नर्सिंग स्टाफ पर बोझ कम होगा और मरीजों को बेहतर देखभाल मिलेगी।
गंभीर बीमारी के मरीजों को मिलेगा उम्दा इलाज
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. काला ने कहा कि मुख्य लक्ष्य अनावश्यक मौतों को रोकना है। इस तकनीक से ‘कोड ब्लू’ की घटनाएं काफी कम होंगी और गंभीर मरीजों को समय पर उचित इलाज मिल सकेगा। भविष्य में इन वार्डों को और अपग्रेड किया जाने की भी तैयारियों पर मंथन चल रहा है। ऐसे में भविष्य में जैसे-जैसे नई एआई सुविधाएं आएंगी, बेड्स को और स्मार्ट बनाया जाएगा। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का मानना है कि यह कदम न केवल इलाज की गुणवत्ता बढ़ाएगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों में हाई-टेक स्वास्थ्य सेवाओं की नई शुरुआत भी करेगा। आम मरीजों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी, क्योंकि अब मौत के मुंह में जाने से पहले ही अलर्ट मिलेगा और जान बचाने की संभावना बढ़ जाएगी।









