
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से दिल दहला देने वाले डॉ. कृतिका रेड्डी हत्याकांड में एक ऐसा मोड़ आया है जिसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए हैं। खुद को कानून और पुलिस की नजरों से बचाने के लिए शातिर पति ने जो जाल बुना था, उसे उसके ही मोबाइल के डिजिटल सबूतों ने तार-तार कर दिया है। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि आरोपी पति महेंद्र रेड्डी ने अपनी पत्नी की हत्या करने के बाद अपनी गर्लफ्रेंड को मैसेज कर न सिर्फ जुर्म कबूला, बल्कि उसे पुलिस से बचने के तरीके भी समझाए।
एनेस्थीसिया का ओवरडोज और ‘परफेक्ट मर्डर’ की साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी महेंद्र रेड्डी ने अपनी मेडिकल जानकारी का बेहद घातक इस्तेमाल किया। उसने अपनी पत्नी डॉ. कृतिका को एनेस्थीसिया का ओवरडोज देकर मौत की नींद सुला दिया। महेंद्र की योजना इस हत्या को एक ‘सामान्य मौत’ का रूप देने की थी, ताकि किसी को उस पर शक न हो। उसने साक्ष्यों को मिटाने और मामले को पूरी तरह से प्राकृतिक मौत दिखाने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन फॉरेंसिक विशेषज्ञों की पैनी नजर से वह बच नहीं सका।
गर्लफ्रेंड के साथ सीक्रेट चैट्स ने उजागर किया काला सच
पुलिस ने जब आरोपी का मोबाइल फोन खंगाला, तो उसमें मौजूद डेटा ने पूरी कहानी बयां कर दी। महेंद्र ने अपनी कथित गर्लफ्रेंड को साफ निर्देश दिए थे कि वह पुलिस के सामने उनके रिश्ते को सिर्फ एक साधारण ‘दोस्ती’ बताए। उसने चैट में लिखा था कि फिलहाल उससे किसी भी तरह का संपर्क न रखे और दूरी बनाकर रहे। अधिकारियों का मानना है कि यह जांच को भटकाने और गवाहों को प्रभावित करने की एक सोची-समझी कोशिश थी।
10 लाख डिजिटल फाइलों की जांच और जमानत याचिका खारिज
इस हाई-प्रोफाइल केस में फॉरेंसिक टीम ने आरोपी के डिवाइस से 10 लाख से ज्यादा डिजिटल फाइलों को रिकवर किया है। इसमें डिलीट किए गए चैट्स, वित्तीय लेनदेन और कॉल लॉग्स शामिल हैं। सबसे बड़ा सबूत वह मैसेज बना जिसमें महेंद्र ने स्वीकार किया था, “मैंने कृतिका को मार डाला है, मैं जेल जाऊंगा।” इन पुख्ता सबूतों के आधार पर सत्र न्यायालय ने आरोपी की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के खिलाफ साक्ष्य अत्यंत मजबूत हैं और ऐसे गंभीर अपराध में उसे राहत देना न्यायसंगत नहीं होगा।











