तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भीषण तनाव और हालिया संघर्ष विराम के बाद एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में हलचल पैदा कर दी है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी ‘TASS’ ने ईरानी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज की खाड़ी’ (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी कटौती कर दी है। अब इस रास्ते से रोजाना 140 के बजाय सिर्फ 15 जहाज ही गुजर सकेंगे।
मोजतबा खामेनी का कड़ा रुख: अब शर्तों पर चलेगा समुद्री व्यापार
ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य को केवल नियंत्रित ही नहीं करेगा, बल्कि इसे अपनी रणनीतिक ताकत के रूप में और अधिक मजबूती से इस्तेमाल करेगा। उनके इस रुख से साफ है कि खाड़ी देशों से होने वाले वैश्विक व्यापार की चाबी अब पूरी तरह ईरान के हाथों में होगी।
फरवरी की जंग और वैश्विक बाजार में मचा हाहाकार
ज्ञात हो कि फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद स्थिति बेकाबू हो गई थी। जवाब में ईरान ने होर्मुज की खाड़ी को बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया था। हालांकि, बुधवार को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के सीजफायर (संघर्ष विराम) पर सहमति बनी, जिसके बाद उम्मीद थी कि रास्ता पहले की तरह खुल जाएगा, लेकिन ईरान की नई शर्तों ने दुनिया को फिर से चिंता में डाल दिया है।
IRGC की इजाजत और क्रिप्टोकरेंसी में वसूली जाएगी ‘तेल फीस’
ईरान ने नई व्यापारिक शर्तें थोप दी हैं। अब इस रास्ते से गुजरने वाले हर जहाज को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से बाकायदा अनुमति लेनी होगी। इतना ही नहीं, सीजफायर के दौरान गुजरने वाले तेल के जहाजों से प्रति बैरल 1 अमेरिकी डॉलर की फीस वसूली जाएगी। ईरान ने साफ किया है कि यह भुगतान केवल ‘क्रिप्टोकरेंसी’ में ही स्वीकार किया जाएगा, जो वैश्विक बैंकिंग प्रतिबंधों से बचने की एक बड़ी चाल मानी जा रही है।
ट्रंप का साझा नियंत्रण का प्रस्ताव और सुरक्षा की चुनौती
ईरानी पाबंदियों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर एक ‘साझा फीस’ लगाने के विकल्प पर विचार कर रहा है, ताकि दोनों देश मिलकर इसे नियंत्रित कर सकें। साथ ही उन्होंने यूरोपीय देशों को अल्टीमेटम दिया है कि वे जल्द बताएं कि इस क्षेत्र की सुरक्षा में वे क्या भूमिका निभाएंगे।
भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा सीधा असर
होर्मुज की खाड़ी महज 34 किलोमीटर चौड़ा एक संकरा रास्ता है, लेकिन दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल और उर्वरकों की बड़ी खेप यहीं से गुजरती है। जहाजों की संख्या 140 से घटकर 15 होने का मतलब है सप्लाई चेन का पूरी तरह ध्वस्त होना। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर है, ऐसे में यदि यह गतिरोध बना रहा तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। हालांकि समझौता हो चुका है, लेकिन इजरायल-लेबनान विवाद के कारण यह डील अभी भी बेहद नाजुक मोड़ पर है।












