बुंदेलखंड का बांदा बना ‘तंदूर’: भीषण गर्मी के बीच बिजली-पानी के भयंकर संकट से त्राहि-त्राहि; स्ट्रेचर पर इलाज करने को मजबूर अस्पताल, ग्रामीण बोले- ‘पानी नहीं तो वोट नहीं’

बांदा: उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड अंचल और विशेष रूप से बांदा जिला इन दिनों कुदरत के कहर और प्रशासनिक दावों के बीच बुरी तरह पिस रहा है. बांदा में इस समय भीषण गर्मी, जानलेवा हीटवेव (लू) और अघोषित बिजली-पानी की कटौती ने आम जनजीवन को पूरी तरह नरक बना दिया है. पारा लगातार नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है और इसके समानांतर ही बिजली की डिमांड भी आसमान छू रही है. आलम यह है कि बांदा जिले में रोजाना 1 एमवीए (मेगा वोल्ट एंपियर) से भी अधिक बिजली की खपत बढ़ रही है. चालू मई महीने के शुरुआती 20 दिनों के भीतर ही जिले में 26 एमवीए का अतिरिक्त पावर लोड दर्ज किया गया है, जिसने बिजली विभाग के ट्रांसमिशन सिस्टम को घुटनों पर ला दिया है.

सरकारी कागजों पर 24 घंटे सप्लाई, सोशल मीडिया पर फूटा जनता का गुस्सा

पावर कॉरपोरेशन (ट्रांसमिशन) विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 मई को बांदा का कुल बिजली लोड 179 एमवीए था, जो 20 मई तक छलांग लगाकर 205 एमवीए पर पहुंच गया. वहीं पड़ोसी जिले चित्रकूट में भी बिजली की खपत 94 एमवीए से बढ़कर 105 एमवीए हो गई है. बांदा 220 केवी सब-स्टेशन के अधिशासी अभियंता (संप्रेषण) अब्बास काजमी का दावा है कि भीषण मांग के बावजूद तय शेड्यूल के तहत शहरी इलाकों में 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों पर साढ़े 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में 20 घंटे निर्बाध बिजली दी जा रही है.

लेकिन, जमीन पर हकीकत इन दावों से कोसों दूर है. सोशल मीडिया पर स्थानीय नागरिकों का गुस्सा उबल रहा है. सुनील कुमार नामक एक यूजर ने यूपीपीसीएल (UPPCL) को टैग करते हुए लिखा कि पाली कोठी पावर हाउस क्षेत्र में रात के वक्त घंटों बत्ती गुल रहती है. वहीं महेश शुक्ला नाम के यूजर ने बबेरू तहसील के टिंडवारी रोड इलाके की पोल खोलते हुए लिखा कि रात 11 बजे से सुबह तक बिजली पूरी तरह ठप रही. 45 से 48 डिग्री के इस टॉर्चर के बीच रात-रात भर बिजली न रहने से छोटे बच्चे और बुजुर्ग तड़पने को मजबूर हैं.

भट्ठी जैसा तपा बांदा: जिला अस्पताल के वार्ड हुए फुल, बेंच और स्ट्रेचर पर इलाज

इस जानलेवा गर्मी और लू का सीधा और खतरनाक असर अब लोगों की सेहत पर दिखने लगा है. तापमान 48 डिग्री के पार पहुंचने के कारण बांदा जिला अस्पताल में मरीजों की बाढ़ आ गई है. दस्त, उल्टी, तेज बुखार, पेट दर्द और गंभीर डायरिया से पीड़ित मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं. अस्पताल के सभी वार्ड पूरी तरह फुल हो चुके हैं. हालात इतने बेकाबू हैं कि नए आने वाले गंभीर मरीजों का इलाज मजबूरी में अस्पताल के बरामदों में लगे स्ट्रेचरों और बेंचों पर लिटाकर किया जा रहा है.

अस्पताल प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण रोजाना 200 से ज्यादा नए मरीज भर्ती किए जा रहे हैं. आम दिनों में जहां जिला अस्पताल की ओपीडी (OPD) में 800 से 900 मरीज आते थे, वहीं अब यह तादाद बढ़कर 1200 के पार पहुंच चुकी है. जैसे ही वार्ड से किसी पुराने मरीज की छुट्टी होती है, तुरंत स्ट्रेचर पर तड़प रहे दूसरे मरीज को वहां बेड दिया जा रहा है.

‘पानी नहीं तो वोट नहीं’: बूंद-बूंद को तरसते ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी

बिजली के साथ-साथ बांदा में पानी का संकट भी चरम पर पहुंच गया है. ग्रामीण इलाकों में जलस्तर (Water Level) पाताल में चले जाने से हैंडपंपों ने दम तोड़ दिया है. गांवों में मासूम बच्चे और महिलाएं पीने के पानी के लिए पुराने कुओं पर निर्भर हैं. ग्राम पंचायत में पसरे इस सन्नाटे और आक्रोश को बयां करते हुए ग्रामीण घासीराम निषाद ने साफ शब्दों में कहा, “हमारे यहां पीने के पानी की भयंकर समस्या है. अधिकारी भले ही कागजों पर समाधान का दावा करें, लेकिन जमीनी हकीकत यह कुआं और यहां लगी लंबी कतारें बयां कर रही हैं. अगर जल्द ही पानी का इंतजाम नहीं हुआ, तो हम आने वाले चुनाव में पूरी तरह से ‘वोट का बहिष्कार’ करेंगे.” ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 15 दिनों से सरकारी पानी की सप्लाई भी पूरी तरह बंद है.

एक्शन मोड में प्रशासन: डीएम ने दिए ‘कूलिंग प्वाइंट’ और टैंकर भेजने के कड़े निर्देश

बांदा में गहराते इस दोहरे संकट के बीच जिला प्रशासन अब अलर्ट मोड पर आया है. बांदा नगर पालिका परिषद द्वारा शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक जगहों पर अस्थायी छायादार ‘कूलिंग प्वाइंट्स’ बनाए गए हैं, जहां लोगों के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था की जा रही है. स्थिति का जायजा लेने खुद जिलाधिकारी (DM) ने जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर का औचक निरीक्षण किया.

डीएम ने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) को सख्त निर्देश दिए कि अस्पताल परिसर में मरीजों और तीमारदारों के लिए पर्याप्त कूलर, वॉटर कूलर और स्पेशल ‘कूलिंग प्वाइंट’ बनाए जाएं ताकि किसी की जान पर न बन आए. इसके साथ ही डीएम ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर सभी ग्राम पंचायतों में कूलिंग सेंटर एक्टिव करने, पानी की किल्लत वाले गांवों में तत्काल सरकारी टैंकर भेजने और खराब पड़े हैंडपंपों को 24 घंटे के भीतर ठीक कराने के कड़े निर्देश दिए हैं. साथ ही तपती गर्मी को देखते हुए ग्रामीण गौशालाओं में मवेशियों के लिए पर्याप्त छाया, पानी और हरे चारे का इंतजाम सुनिश्चित करने को कहा गया है.

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