लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बेरोजगारी का फायदा उठाकर नौजवानों को अपना शिकार बनाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए विभूति खंड इलाके में चल रहे एक हाईटेक फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी की। इस दौरान पुलिस ने तीन सगी बहनों समेत कुल पांच शातिर ठगों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इन जालसाजों के पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल ये युवाओं को ठगने के लिए करते थे।
नौकरी वाली वेबसाइट्स से चुराते थे डेटा, ऐसे बुनते थे जालसाजी का ताना-बाना
पकड़े गए आरोपियों का तौर-तरीका बेहद शातिर था। देश में रोजगार की तलाश कर रहे युवक-युवतियां जब नामचीन जॉब वेबसाइट्स पर अपनी प्रोफाइल और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करते थे, तो यह गैंग वहां से उनका गुप्त डेटा और मोबाइल नंबर चुरा लेता था। इसके बाद फर्जी कॉल सेंटर से युवाओं को फोन किया जाता था और खुद को बड़ी नामी कंपनियों या सरकारी एजेंसियों का रिक्रूटमेंट पार्टनर बताया जाता था। कम समय में अच्छी नौकरी और बेहतरीन सैलरी का झांसा देकर ये गैंग भोले-भाले युवाओं को अपने जाल में फंसा लेता था।
प्रोसेसिंग फीस और फर्जी जॉइनिंग लेटर देकर वसूलते थे मोटी रकम
पुलिस की तफ्तीश में सामने आया है कि एक बार जब बेरोजगार युवा इनकी बातों में आ जाते, तो ये अलग-अलग चरणों में पैसों की डिमांड शुरू कर देते थे। कभी प्रोफाइल वेरिफिकेशन फीस, कभी मेडिकल टेस्ट तो कभी सिक्योरिटी मनी के नाम पर खातों में रकम ट्रांसफर करवाई जाती थी। युवाओं को शक न हो, इसके लिए यह शातिर गैंग हूबहू असली दिखने वाले फर्जी जॉइनिंग लेटर (Fake Joining Letter) भी ईमेल और व्हाट्सएप पर भेज देता था। पैसे ऐंठने के बाद आरोपी अपने फोन नंबर बंद कर लिया करते थे।
गोपनीय इनपुट पर एडीसीपी क्राइम किरण यादव की टीम ने मारा छापा
इस बड़े फर्जीवाड़े की जानकारी देते हुए आईपीएस एडीसीपी (क्राइम) किरण यादव ने बताया कि पुलिस को काफी समय से विभूति खंड थाना क्षेत्र में एक अवैध कॉल सेंटर संचालित होने की खुफिया सूचना मिल रही थी। इनपुट की पुष्टि होने के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से चिन्हित ठिकाने पर छापेमारी की। मौके से पांच लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनसे पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपियों के कब्जे से कई लैपटॉप, मोबाइल फोन, इंटरनेट डोंगल, डेटा शीट और भारी संख्या में फर्जी जॉइनिंग लेटर बरामद हुए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस गैंग ने अब तक कितने युवाओं से कितने लाख की ठगी की है।












