
- चिकन पॉक्स वायरस से मरीजों की संख्या बढ़ी …. झाड़ फूंक के चक्कर में मरीज न पड़े, हो सकती है,कई परेशानियां
- 8-10 दिनों तक दवा खा कर मरीज हो सकता है पूरी तरह स्वस्थ
- इम्युनिटी कमजोर होने के कारण होता है चिकन पॉक्स
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कानपुर। गर्मी आते ही कई वायरस का प्रभाव तेज कर देते है ,चिकन पॉक्स एक वायरस है, जिसे आम तौर पर लोग छोटी माता या बड़ी माता कह कर बुलाते है। जबकि चिकन पॉक्स का डाक्टर की सलाह लेकर आगे इलाज कराया जाए तो आने वाली कई बीमारियों से बचा जा सकता है। मरीज 8 से 10 दिनों में बिल्कुल स्वस्थ हो सकता है। हेलेट अस्पताल की ओपीडी में चिकन पॉक्स के बच्चों से लेकर बड़ी उम्र के मरीजों की संख्या देखने को मिल रही हैं।लेकिन अगर किसी तरह के अंधविश्वास में पड़ कर मरीज की झाड़ फूंक करवाई तो आगे चल कर मरीज की हालत गंभीर भी हो सकती है यहां तक कि उसे सांस लेने में दिक्कत भी हो सकती है। लेकिन अब चिकन पॉक्स का इलाज अब पूरी तरह संभव है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ डी पी शिवहरे ने बताया कि चिकन पॉक्स किसी भी उम्र में किसी को भी हो सकता है ये एक वायरस है,अक्सर देखा गया है कि चिकन पॉक्स बच्चों में ज्यादातर होता है ,अब बड़े उम्र में देखने को मिलने लगा है।चिकन पॉक्स होने पर शरीर में कई जगह लाल दाने निकल आते हैं जो बाद में अपना दाग छोड़ जाते हैं।जिसमें इंफेक्शन हो सकता है उसमें पपड़ी बन जाती है उसके साथ-साथ सेप्टीसीमिया भी हो सकता है , चिकन पॉक्स कई तरीके से विभिन्न अंगों पर भी अपना प्रभाव डालता है जैसे दिमाग पर असर पड़ सकता है सांस लेने दिक्कत होना ,वायरस निमोनिया होना ,फेफड़ों में इंफेक्शन, ब्रेन में इंफेक्शन ,लीवर तथा हार्ट में इंफेक्शन के साथ-साथ आंखों पर भी ये अपना प्रभाव डालती है जिससे आंखों की रोशनी तक जा सकती है। डॉ श्री शिवहरे ने बताया कि चिकन पॉक्स होने का मुख्य कारण इम्युनिटी का कमजोर होना है ,जिससे ये बीमारी बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को हो सकती है।
चिकन पॉक्स से बचाव
डॉ डी पी शिवहरे ने बताया कि चिकन पॉक्स का बचाव यही है कि घरेलू इलाज न करे, झाड़ फूंक के चक्कर में मरीज की समस्या को न बढ़ाए, डॉ की सलाह लेकर मरीज का इलाज शुरू करे। मरीज के द्वारा इस्तेमाल की हुई चीजें जैसे तौलिया, कम्बल, तकिया और उसके पहने कपड़े का उपयोग बिल्कुल न करे क्यों कि ये परिवार में किसी को आपने चपेट में ले सकती है।ये वायरस है जो जल्द दूसरों में लग जाती है। बचाव और सही इलाज से मरीज 8 से 10 दिनों में पूरी तरह ठीक हो जाता है।स्किन रोग विभागाध्यक्ष डॉ शिव हरे ने बताया कि डॉक्टर की सलाह पर इलाज कराए ,घरेलू उपचार से बचे।











