“70-80% नेता देखते हैं पोर्न, करा लीजिए फोन की जांच”: विवादित बयानों पर पप्पू यादव की दो टूक….महिला आयोग के नोटिस पर उठाए सवाल

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव अपने बेबाक और विवादित बयानों के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं। महिलाओं और राजनेताओं के चरित्र को लेकर दिए गए उनके बयानों पर बिहार महिला आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया है। हालांकि, पप्पू यादव ने झुकने के बजाय आयोग और राजनेताओं पर पलटवार करते हुए अपने दावों पर कायम रहने की बात कही है।

“70-80% नेता देखते हैं पोर्न, करा लीजिए फोन की जांच”

सांसद पप्पू यादव ने पिछले दिनों लोकसभा में दावा किया था कि गूगल पर पोर्न देखने की सबसे ज्यादा लत नेताओं को है। महिला आयोग के नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा:

“मैंने सदन के पटल पर भी यह बात कही है कि 70-80% राजनेता पोर्न देखते हैं। सबकी जांच करवाइए। अगर मेरे फोन में पोर्न मिलता है, तो मेरी भी जांच कीजिए। जो लोग शीशे के घरों में रहते हैं, उन्हें दूसरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए।”

महिलाओं के शोषण पर किया बड़ा दावा

पप्पू यादव ने अपने उस बयान का भी बचाव किया जिसमें उन्होंने कहा था कि कई पुरुष राजनेता महिलाओं का शोषण किए बिना उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने नहीं देते। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा:

  • यौन शोषण के मामले: पप्पू यादव के अनुसार, 755 पुरुष राजनेताओं के खिलाफ यौन शोषण के मामले दर्ज हैं।

  • चार्जशीट: इनमें से 155 नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है।

  • तर्क: उन्होंने कहा कि वे महिलाओं के खिलाफ होने वाले इस सिस्टमैटिक शोषण के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे हैं और सच बोलने पर उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।

महिला आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

नोटिस मिलने के बाद पप्पू यादव ने बिहार महिला आयोग की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आयोग से पूछा:

  1. नीट छात्रा मामला: पटना में नीट छात्रा के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में आयोग ने क्या ठोस कार्रवाई की?

  2. नालंदा घटना: नालंदा में सरेराह महिला के साथ रेप की कोशिश की घटना पर आयोग चुप क्यों रहा?

  3. पक्षपात का आरोप: सांसद ने आरोप लगाया कि आयोग के सदस्यों की तस्वीरें पूर्व मंत्रियों के साथ हैं, जिससे उनकी कार्यशैली पर संदेह पैदा होता है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा विवाद पप्पू यादव के उस बयान से शुरू हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि “90% महिलाओं का राजनीतिक करियर नेताओं के बिस्तर से शुरू होता है।” इस बयान को महिला संगठनों और आयोग ने बेहद अपमानजनक माना है। वहीं, पप्पू यादव का कहना है कि उनकी बात का गलत अर्थ निकाला गया है और वे दरअसल पुरुष राजनेताओं की ‘गंदी मानसिकता’ को उजागर कर रहे हैं।

फिलहाल, पूर्णिया सांसद के इन तीखे तेवरों ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि महिला आयोग इस कड़े पलटवार के बाद क्या अगला कदम उठाता है।

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