नई दिल्ली। भारत सरकार ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाने जा रही है। चालू वर्ष के अंत तक देश में E85 पेट्रोल (85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल का मिश्रण) को रोलआउट करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस महत्वाकांक्षी कदम का मुख्य उद्देश्य महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और अन्नदाताओं यानी किसानों की आय में वृद्धि करना है।
ऑटोमोबाइल दिग्गजों ने भरी हामी, तकनीक के साथ तैयार है इंडस्ट्री
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने ऑटोमोबाइल निर्माताओं के साथ गहन परामर्श के बाद यह फैसला लिया है। कार और दोपहिया वाहन निर्माताओं ने पुष्टि की है कि वे फ्लेक्स-फ्यूल वाहन (FFV) बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इन वाहनों की खासियत यह होगी कि ये E20 से लेकर E100 तक के किसी भी मिश्रण पर चल सकेंगे। इनमें लगे स्मार्ट ऑनबोर्ड सेंसर फ्यूल मिक्स के अनुसार इंजन के इग्निशन और इंजेक्शन पैरामीटर को खुद ही एडजस्ट कर लेंगे।
E85 ही क्यों? वैज्ञानिक रूप से बेहतर और व्यावहारिक विकल्प
सरकार ने E100 (100% इथेनॉल) के बजाय E85 को इसलिए प्राथमिकता दी है क्योंकि यह वैज्ञानिक रूप से अधिक स्थिर है। शुद्ध इथेनॉल का ऊर्जा घनत्व पेट्रोल के मुकाबले 30-35% कम होता है, जिससे माइलेज पर असर पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौती ‘कोल्ड स्टार्ट’ की है; ठंडे मौसम में शुद्ध इथेनॉल के साथ इंजन स्टार्ट करना मुश्किल होता है। E85 में 15% पेट्रोल मिलाने से वाष्प दबाव (Vapor Pressure) बेहतर बना रहता है और इंजन सुचारू रूप से काम करता है।
BIS ने तय किए मानक, 30 अप्रैल तक जारी होंगे नए नियम
ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने E85 के लिए मानक तैयार कर लिए हैं। रिफाइनर्स और ब्लेंडर्स को इन्हीं विशिष्टताओं का पालन करना होगा। इतना ही नहीं, BIS 30 अप्रैल तक E22, E25 और E26 के लिए भी मानक जारी करने वाला है। देश में मल्टी-फ्यूल पॉलिसी लागू होगी, जिससे पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों को अलग-अलग ब्लेंड वाले ईंधन के विकल्प मिलेंगे। गौरतलब है कि अप्रैल 2026 से देशभर में E20 पेट्रोल अनिवार्य रूप से लागू हो चुका है।
किसानों की बढ़ेगी आय और घटेगा प्रदूषण: ब्राजील का मॉडल बनेगा मिसाल
ईंधन ब्लेंडिंग कार्यक्रम से भारत पहले ही सालाना 4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा बचा रहा है। चूंकि इथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने की चाशनी और कृषि अवशेषों से बनता है, इसलिए इसकी मांग बढ़ने का सीधा लाभ गन्ना किसानों को मिलेगा। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक है, ऐसे में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा। ब्राजील का उदाहरण हमारे सामने है, जहाँ 2003 से फ्लेक्स-फ्यूल कारें चल रही हैं और वहां कार्बन उत्सर्जन में 90% तक की कमी देखी गई है।














