आगरा: उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण के काले खेल को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आगरा पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस धर्मांतरण गैंग के तार न केवल देश के विभिन्न राज्यों, बल्कि सीमा पार पाकिस्तान से भी जुड़े हुए हैं। पूछताछ के दौरान दिल्ली के शाहीन बाग और बाटला हाउस जैसे इलाकों से संदिग्ध लेनदेन और फंडिंग के पुख्ता सबूत मिलने की बात सामने आई है। तीन दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड खत्म होने के बाद मंगलवार को चारों आरोपितों को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
बाटला हाउस और शाहीन बाग में छिपे हैं अहम दस्तावेज
पुलिस की पूछताछ में आरोपित तलमीज उर रहमान ने खुलासा किया है कि धर्मांतरण के लिए होने वाली विदेशी फंडिंग और हवाई टिकटों का पूरा रिकॉर्ड दिल्ली के बाटला हाउस क्षेत्र में डॉ. आदिल के पास सुरक्षित रखा है। वहीं, एक अन्य आरोपित परवेज अख्तर ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद के दवा केंद्र पर धर्मांतरण से जुड़े लेन-देन का रजिस्टर मेंटेन किया जाता था। पुलिस की कार्रवाई के डर से इस रजिस्टर को शाहीन बाग में कहीं छिपा दिया गया है। पुलिस अब इन साक्ष्यों को बरामद करने की तैयारी में है।
पाकिस्तान कनेक्शन और ‘डिजिटल’ हिसाब-किताब
इस मामले में सबसे गंभीर खुलासा जतिन कपूर उर्फ जाशिक कपूर ने किया है। उसने स्वीकार किया कि वह पाकिस्तान के कुछ लोगों के निरंतर संपर्क में था और उनके मोबाइल नंबर उसके टैब में दर्ज हैं। इस टैब में धर्मांतरण के लिए दी जाने वाली आर्थिक मदद का पूरा हिसाब-किताब और मददगारों के नाम भी शामिल हैं। वहीं, राजस्थान के डींग निवासी हसन मोहम्मद ने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी के दामाद ने कश्मीर से लेकर कई अन्य राज्यों तक इस नेटवर्क को फैला रखा है।
रिमांड बढ़ाने की अर्जी पर आज होगी सुनवाई
सदर इलाके की दो सगी बहनों के धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार किए गए तलमीज उर रहमान, परवेज अख्तर, जतिन कपूर और हसन मोहम्मद की तीन दिन की रिमांड मंगलवार को समाप्त हो गई। विवेचक रीता यादव और अभियोजन अधिकारी बृजमोहन सिंह कुशवाह ने कोर्ट से साक्ष्यों की बरामदगी के लिए तीन दिन की अतिरिक्त रिमांड की मांग की है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने आरोपितों को फिलहाल जेल भेज दिया है और पुलिस रिमांड की अर्जी पर बुधवार (6 मई) को सुनवाई के आदेश दिए हैं।
देशव्यापी नेटवर्क को खंगाल रही है आगरा पुलिस
डीसीपी आदित्य सिंह के अनुसार, इस गिरोह का जाल कश्मीर से लेकर राजस्थान और दिल्ली तक फैला हुआ है। पुलिस को उम्मीद है कि यदि अगले तीन दिनों की कस्टडी रिमांड मिलती है, तो पाकिस्तान से हुई बातचीत के रिकॉर्ड, फंडिंग के रजिस्टर और डिजिटल सबूतों को बरामद किया जा सकेगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां भी इस जांच पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि इसमें विदेशी ताकतों की संलिप्तता के संकेत मिल रहे हैं।










