यूपी पंचायत चुनाव 2026 में ‘डिजिटल पहरा’: अब फर्जी वोटर नहीं बचेंगे, इस सिस्टम से पलक झपकते होगी पहचान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में फर्जी मतदान (Fake Voting) पर अंकुश लगाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की पहचान केवल वोटर आईडी से नहीं, बल्कि उनके चेहरे और आंखों की पुतलियों से होगी। ‘फेशियल रिकग्निशन सिस्टम’ (FRS) के सफल ट्रायल के बाद अब इसे बड़े स्तर पर लागू करने की तैयारी है।

पायलेट प्रोजेक्ट सफल: शाहजहांपुर और कुशीनगर में दिखा दम

राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह ने बताया कि मंगलवार को हुए नगर पंचायत अध्यक्ष के उपचुनावों में इस तकनीक का सफल परीक्षण किया गया। शाहजहांपुर की कटरा और कुशीनगर की फाजिलनगर सीट पर कुल 50,257 मतदाताओं पर एफआरएस का प्रयोग किया गया। देश के चुनावी इतिहास में यह पहली बार है जब इतनी बड़ी आबादी पर रीयल-टाइम फेशियल वेरिफिकेशन का इस्तेमाल हुआ है।

कैसे काम करेगा एफआरएस (FRS) मोबाइल एप?

यह सिस्टम पूरी तरह डिजिटल और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग पर आधारित है:

  • स्टेट वोटर नंबर (SVN): हर मतदाता को एक यूनिक स्टेट वोटर नंबर जारी किया गया है।

  • फोटो कैप्चर: पोलिंग स्टेशन पर पीठासीन अधिकारी के मोबाइल में एफआरएस एप होगा। जैसे ही कोई वोटर आएगा, उसकी फोटो खींची जाएगी।

  • डाटा लॉक: फोटो खींचते ही उस वोटर का डाटा रीयल-टाइम में ‘वोटेड’ लिस्ट में दर्ज हो जाएगा।

  • पकड़े जाएंगे फर्जी वोटर: यदि वही व्यक्ति दोबारा किसी दूसरे बूथ पर वोट डालने पहुंचेगा, तो एप फोटो खींचते ही अलर्ट जारी कर देगा। पीठासीन अधिकारी को तुरंत पता चल जाएगा कि इस व्यक्ति ने पहले किस बूथ पर और कितने बजे वोट डाला है।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम और डिजिटल मॉनिटरिंग

आयोग ने इस तकनीक को फुलप्रूफ बनाने के लिए खास व्यवस्था की है। वोटिंग के दौरान पीठासीन अधिकारी के मोबाइल पर केवल एफआरएस एप ही काम करेगा; कॉलिंग और मैसेजिंग जैसी सुविधाएं बंद रहेंगी। साथ ही, लखनऊ स्थित कंट्रोल रूम से हर मोबाइल के बैटरी बैकअप की भी ऑनलाइन निगरानी की जाएगी। यदि किसी मोबाइल की बैटरी कम होगी, तो तत्काल बैकअप उपलब्ध कराया जाएगा।

पंचायत के बाद निकाय चुनाव में भी तैयारी

इस पायलेट प्रोजेक्ट की सफलता ने राज्य निर्वाचन आयोग का उत्साह बढ़ा दिया है। 2026 में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के करीब 2.2 लाख पोलिंग बूथों पर इसे लागू करने का लक्ष्य है। इसके बाद होने वाले नगर निकाय चुनावों में भी इसी पारदर्शी तकनीक का इस्तेमाल कर ‘वन मैन, वन वोट’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जाएगा।

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