गुरु प्रदोष व्रत 2026: शत्रुओं पर विजय और सुख-समृद्धि के लिए ऐसे करें महादेव की विशेष पूजा

नई दिल्ली। हिन्दू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित प्रदोष व्रत रखा जाता है। मई 2026 का पहला प्रदोष व्रत गुरुवार, 14 मई को पड़ रहा है। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘गुरु प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। यह व्रत न केवल महादेव की कृपा दिलाता है, बल्कि कुंडली में बृहस्पति ग्रह (गुरु) को भी मजबूत करता है।

गुरु प्रदोष व्रत 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त के समय यानी प्रदोष काल में की जाती है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं।

  • व्रत की तिथि: 14 मई 2026, गुरुवार

  • त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 मई, सुबह 11:21 बजे से

  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 मई, सुबह 08:32 बजे तक

  • पूजा का शुभ समय (प्रदोष काल): शाम 07:04 बजे से रात 09:09 बजे तक

पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

पूजा सफल बनाने के लिए इन सामग्रियों का उपयोग विशेष फलदायी होता है:

  • अभिषेक हेतु: गंगाजल, गाय का कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर (पंचामृत)।

  • पूजन सामग्री: सफेद चंदन, भस्म, अक्षत (साबुत चावल), बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और मंदार (आक) के फूल।

  • श्रृंगार एवं आरती: कलावा, रुई की बत्ती, कपूर, धूप-दीप, मौसमी फल और नैवेद्य (मिठाई)।

स्टेप-बाय-स्टेप पूजा विधि

यदि आप पहली बार व्रत रख रहे हैं या विधि को लेकर संशय में हैं, तो इस सरल प्रक्रिया का पालन करें:

  1. प्रातः काल संकल्प: सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

  2. दिनचर्या: दिनभर भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ का मानसिक जाप करें। आप सामर्थ्यानुसार फलाहार ले सकते हैं।

  3. प्रदोष काल पूजन: शाम को पुनः स्नान कर सफेद वस्त्र पहनें। शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।

  4. अर्पण: शिव जी को चंदन और भस्म का तिलक लगाएं। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।

  5. कथा एवं आरती: गुरु प्रदोष की व्रत कथा सुनें या पढ़ें। अंत में शिव चालीसा का पाठ कर कपूर से आरती उतारें।

गुरु प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। चूंकि गुरुवार का दिन देवताओं के गुरु बृहस्पति का है, इसलिए इस दिन व्रत करने से ज्ञान, बुद्धि और धन में वृद्धि होती है। विशेष रूप से वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-शांति का वास होता है।

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