नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और वैश्विक तेल संकट का असर अब भारतीय रसोइयों और सड़कों पर साफ दिखने लगा है। पिछले 48 घंटों के भीतर भारतीय उपभोक्ताओं पर महंगाई की चौतरफा मार पड़ी है। दूध और सीएनजी के दाम बढ़ने के बाद अब तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर से अधिक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस झटके ने आम आदमी के घरेलू बजट को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है।
ईंधन के नए दाम: जेब पर पड़ेगा भारी बोझ
शुक्रवार सुबह जारी नई दरों के अनुसार, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लंबी छलांग देखी गई है। तेल कंपनियों ने कच्चे तेल की बढ़ती लागत का हवाला देते हुए निम्नलिखित बढ़ोतरी की है:
| ईंधन का प्रकार | बढ़ोतरी (प्रति लीटर) | नई अनुमानित दर (प्रति लीटर) |
| नियमित पेट्रोल | ₹3.14 | ₹97.91 |
| नियमित डीजल | ₹3.11 | ₹90.78 |
| प्रीमियम पेट्रोल | – | ₹105.14 – ₹107.14 |
सीएनजी और दूध भी हुए महंगे
ईंधन के अलावा, अन्य आवश्यक वस्तुओं ने भी आम जनता को नहीं बख्शा है:
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सीएनजी (CNG): देश भर में सीएनजी की कीमतों में ₹2 प्रति किलो का इजाफा हुआ है। मुंबई में तो यह दर ₹84 प्रति किलो तक पहुंच गई है, जिससे ऑटो और टैक्सी का सफर महंगा होना तय है।
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दूध: इससे पहले बुधवार को ही अमूल और मदर डेयरी ने दूध के दाम में ₹2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी, जिसका सीधा असर दही, पनीर और घी जैसे उत्पादों पर पड़ेगा।
क्यों बढ़ रही है महंगाई?
इस अचानक आए उछाल के पीछे मुख्य रूप से भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारण जिम्मेदार हैं:
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ईरान-इजरायल तनाव: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के खतरों ने वैश्विक बाजार को अस्थिर कर दिया है।
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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का संकट: यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्ग है। यहां सप्लाई चेन बाधित होने से कच्चे तेल की कमी हो गई है और परिवहन लागत बढ़ गई है।
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आपूर्ति और मांग का अंतर: वैश्विक आपूर्ति में कमी के कारण भारतीय तेल कंपनियां घाटे में चल रही थीं, जिसकी भरपाई अब कीमतों में वृद्धि के जरिए की जा रही है।
प्रधानमंत्री की अपील और भविष्य की चुनौतियां
बढ़ते तेल संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री ने हाल ही में नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की है। उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए अपने काफिले की गाड़ियों में भी कमी की है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: अगर पश्चिम एशिया का संकट जल्द खत्म नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में महंगाई और भी खतरनाक रूप ले सकती है। डीजल महंगा होने का सीधा मतलब है माल ढुलाई (Logistics) का महंगा होना। इसका असर सीधे तौर पर सब्जियों, फलों और अनाज की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे मध्यम वर्ग के लिए घर चलाना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।















