नई दिल्ली। वैश्विक ऊर्जा बाजार में आज रात एक बड़ा मोड़ आने वाला है। रूसी कच्चे तेल के आयात पर अमेरिका द्वारा दी गई विशेष रियायत की समय सीमा आज यानी 16 मई की रात 12:01 बजे समाप्त हो रही है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में पिछले ढाई महीनों (75 दिनों) से जारी गतिरोध और वैश्विक सप्लाई चेन पर बढ़ते दबाव के बीच भारत के सामने ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में भारत ने एक बार फिर वाशिंगटन से इस छूट की अवधि को आगे बढ़ाने की अपील की है ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा पर संकट: भारत ने अमेरिका से की रियायत की मांग
मार्च में शुरू की गई इस विशेष व्यवस्था का असल मकसद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कमी को रोकना था। हालांकि, अमेरिका अब भारत पर दबाव बना रहा है कि वह यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर मॉस्को से रियायती दरों पर तेल खरीदना कम करे। दूसरी ओर, भारतीय अधिकारियों ने अपना रुख साफ कर दिया है। 28 फरवरी से मध्य पूर्व में उपजे तनाव को देखते हुए भारत ने स्पष्ट कहा है कि देश के 140 करोड़ नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी कहा है कि तेल बाजार में अस्थिरता का असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
रिफाइनरी कंपनियों में मची होड़, मई में बना आयात का रिकॉर्ड
अमेरिकी छूट खत्म होने की आहट ने भारतीय रिफाइनरी कंपनियों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। भविष्य में किसी भी संभावित संकट से बचने के लिए कंपनियों ने रूसी तेल की खरीदारी में भारी तेजी दिखाई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर को छू गया है। हालांकि, भारत प्रतिबंधों को लेकर भी सतर्क है। उन रूसी एलएनजी (LNG) कार्गो को लेने से साफ इनकार कर दिया गया है जो सीधे अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में हैं। इसी सख्ती के चलते कम से कम एक बड़ा शिपमेंट फिलहाल सिंगापुर के पास समुद्र में अटका हुआ है।
पेट्रोलियम मंत्री ने दिया भरोसा: ‘देश में नहीं होगी ईंधन की किल्लत’
आपूर्ति को लेकर आम जनता के बीच बढ़ती आशंकाओं पर विराम लगाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में फिलहाल 69 दिनों का एलएनजी और 45 दिनों का एलपीजी स्टॉक सुरक्षित है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एलपीजी का दैनिक उत्पादन 36,000 टन से बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया गया है।
जून में रूस के साथ बड़ी बैठक, कूटनीति पर टिकी नजरें
इस पूरे मामले को सुलझाने के लिए अब सबकी नजरें जून में होने वाली उच्च स्तरीय वार्ता पर टिकी हैं। रूसी उप ऊर्जा मंत्री और भारतीय पेट्रोलियम मंत्री के बीच होने वाली इस बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति के नए विकल्पों पर चर्चा होगी। फिलहाल, केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि घरेलू बाजार में तेल और गैस की सप्लाई पर कोई आंच न आए।















