ऐतिहासिक फैसला: धार की भोजशाला को हाई कोर्ट ने माना ‘हिंदू मंदिर’, एएसआई की रिपोर्ट ने पलटा पूरा मामला

इंदौर/धार: मध्य प्रदेश के धार स्थित विवादित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने ऐतिहासिक और निर्णायक फैसला सुनाया है। अदालत ने एएसआई (ASI) की वैज्ञानिक रिपोर्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर भोजशाला को ‘हिंदू मंदिर’ करार दिया है। हिंदू पक्ष के लिए इसे एक बड़ी जीत माना जा रहा है, क्योंकि कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर वहां पूजा-अर्चना का अधिकार भी प्रदान कर दिया है।

परमार वंश का शिक्षा केंद्र और वाग्देवी का मंदिर

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में ऐतिहासिक साहित्य का हवाला देते हुए कहा कि यह विवादित क्षेत्र राजा भोज द्वारा स्थापित ‘भोजशाला’ है, जो संस्कृत शिक्षा का एक प्रतिष्ठित केंद्र था। कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “हमने पाया है कि इस स्थल पर हिंदू पूजा-अर्चना की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई है।” अदालत ने माना कि यह स्थान परमार वंश के गौरवशाली इतिहास और उनकी धार्मिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ा है।

पुरातत्व विज्ञान पर भरोसा: ASI की रिपोर्ट बनी आधार

कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि यह स्थल वाग्देवी मंदिर है या कमल मौला मस्जिद। इस पर कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की 98 दिनों की वैज्ञानिक जांच और 2000 पन्नों की रिपोर्ट पर पूर्ण विश्वास जताया। अदालत ने कहा:

  • पुरातत्व एक विज्ञान है: कोर्ट ने एएसआई के निष्कर्षों को वैज्ञानिक प्रमाण मानते हुए उन पर भरोसा किया।

  • संरक्षित इमारत: यह स्पष्ट किया गया कि यह एक संरक्षित इमारत है और इसकी निगरानी व संरक्षण का पूरा अधिकार एएसआई के पास है।

  • मंदिर के अवशेषों पर निर्माण: एएसआई की रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्तमान ढांचे का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों, स्तंभों और नक्काशीदार पत्थरों का उपयोग करके किया गया था।

मुश्किल समय में आया फैसला, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दिलचस्प बात यह है कि अदालत का यह फैसला शुक्रवार के दिन आया, जब मुस्लिम समुदाय वहां नमाज अदा कर रहा था। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए धार प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे:

  • भारी पुलिस बल: शहर में 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए और नाकेबंदी की गई।

  • सोशल मीडिया पर नजर: भड़काऊ पोस्ट रोकने के लिए निगरानी रखी गई और कुछ अराजक तत्वों को गिरफ्तार भी किया गया।

  • शांतिपूर्ण नमाज: फैसले के बीच आज की नमाज पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई।

मुस्लिम पक्ष के लिए कोर्ट का विकल्प

हाई कोर्ट ने जहां हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया, वहीं मुस्लिम पक्ष के लिए भी रास्ता खुला रखा है। अदालत ने कहा कि मुस्लिम पक्ष मस्जिद की जमीन के लिए अलग से आवेदन कर सकता है। कोर्ट ने अयोध्या मामले की मिसाल देते हुए अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों और पुरातात्विक साक्ष्यों के संतुलन पर जोर दिया।

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