बड़ी खबर: क्या फिर महंगी होगी गाड़ी की टंकी? 3 रुपये की बढ़ोतरी के बाद भी पेट्रोल पर ₹11 और डीजल पर ₹39 का भारी घाटा!

नई दिल्ली:  पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में पिछले ढाई महीने से जारी भीषण भू-राजनीतिक संकट और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ईंधन बाजार में आग लगा दी है। इस तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें रॉकेट बन चुकी हैं। एक समय तो कच्चा तेल उछलकर 130 डॉलर प्रति बैरल के डरावने स्तर पर पहुंच गया था और मौजूदा वक्त में भी यह लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है। कच्चे तेल के इस आसमान छूते दाम के कारण देश की सरकारी तेल कंपनियों की कमर टूट रही थी और उन्हें हर महीने करीब 30,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा था।

इस भारी घाटे से निपटने के लिए सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर आम जनता को झटका दिया है। देश में करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद पहली बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह तो बस शुरुआत है, आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

3 रुपये की बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरा, अभी इतने रुपये और बढ़ने के आसार

पेट्रोलियम इंडस्ट्री से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का साफ कहना है कि शुक्रवार को की गई 3 रुपये की मामूली बढ़ोतरी से तेल कंपनियों को हो रहे छप्परफाड़ नुकसान की भरपाई किसी भी सूरत में नहीं हो सकती। इंडस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि इस ताजा बढ़ोतरी के बावजूद कंपनियों को पेट्रोल बेचने पर अब भी 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर पूरे 39 रुपये प्रति लीटर का भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।

आपको बता दें कि शुक्रवार को दाम बढ़ाए जाने से पहले सरकारी तेल कंपनियों को हर एक लीटर पेट्रोल पर 14 रुपये और डीजल पर 42 रुपये का शुद्ध घाटा हो रहा था। 3 रुपये की इस बढ़ोतरी के बाद कंपनियों का दर्द सिर्फ थोड़ा सा कम हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल कंपनियों को पूरी तरह से घाटे के दलदल से बाहर निकालने के लिए आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर भारी बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का दिखा असर, कच्चे तेल में 50% का उछाल

इस पूरे संकट की जड़ें ईरान पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमले से जुड़ी हैं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से भी ज्यादा की जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। युद्ध के कारण पैदा हुए इस वैश्विक संकट के बीच घरेलू बाजार में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता (सप्लाई) बनाए रखने के लिए सरकार ने एक और बड़ा नीतिगत कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात (Export) पर 3 रुपये प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) लगा दिया है।

विमान ईंधन और डीजल के निर्यात पर राहत, नई दरें लागू

एक तरफ जहां पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर टैक्स लगाया गया है, वहीं दूसरी तरफ सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को 23 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। इसके साथ ही हवाई सफर से जुड़े विमान ईंधन (ATF) पर लगने वाले कर को भी 33 रुपये प्रति लीटर से भारी कटौती करते हुए सीधे 16 रुपये प्रति लीटर पर ला दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, ये सभी संशोधित नई दरें शनिवार से देश में प्रभावी रूप से लागू हो चुकी हैं।

मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर सड़क और अवसंरचना उपकर (रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस) शून्य रहेगा। इसके अलावा, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि घरेलू खपत के लिए स्वीकृत पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा शुल्क दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। लेकिन पश्चिम एशिया संकट की शुरुआत के बाद पहली बार पेट्रोल पर 3 रुपये प्रति लीटर का यह विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है, जिसका असर आने वाले दिनों में देश की आर्थिक रफ्तार और आम आदमी की जेब पर पड़ना तय माना जा रहा है।

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