यूपी लेखपाल भर्ती परीक्षा: लखनऊ में पेपर लीक की अफवाह निकली पूरी तरह फर्जी, प्रदेश भर में 82.29% अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) की ओर से आयोजित लेखपाल भर्ती मुख्य परीक्षा राज्य के 44 जिलों में बेहद कड़ी सुरक्षा, अभूतपूर्व निगरानी और भारी सुरक्षा इंतजामों के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। प्रदेश भर में कुल 7,994 रिक्त पदों के लिए आयोजित इस लिखित परीक्षा में कुल 82.29 फीसदी अभ्यर्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि, परीक्षा की शुरुआत में राजधानी लखनऊ के एक केंद्र पर पेपर लीक की अफवाह उड़ने से कुछ देर के लिए प्रशासनिक अमले में हड़कंप जरूर मचा, लेकिन आयोग और जिला प्रशासन की त्वरित मुस्तैदी से यह सूचना पूरी तरह झूठी और निराधार साबित हुई।

एक ही पाली में हुआ महामुकाबला, 3 लाख से अधिक युवाओं ने आजमाया भाग्य

लेखपाल भर्ती की यह महत्वपूर्ण परीक्षा बृहस्पतिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक केवल एक ही पाली में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा से जुड़े मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • कुल पंजीकृत अभ्यर्थी: 3,66,712

  • उपस्थित अभ्यर्थी: 3,01,756 (82.29%)

  • कुल परीक्षा केंद्र: 44 जिलों में बनाए गए 861 केंद्र

लखनऊ के केंद्र पर यूं उड़ी अफवाह, आयोग के सचिव ने सामने आकर दी सफाई

परीक्षा शुरू होते ही लखनऊ के ऐशबाग स्थित गोपीनाथ लक्ष्मणदास रस्तोगी इंटर कॉलेज के कमरा संख्या 21 से पेपर लीक होने की अफवाह सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर फैल गई। खबर मिलते ही उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने तुरंत एक्शन लिया और जिला प्रशासन के साथ मिलकर मौके पर गहन सत्यापन कराया।

आयोग के सचिव हरिकेश चौरसिया ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रश्नपत्र और ओएमआर शीट के सील पैकेट पूरी तरह सुरक्षित और इंटैक्ट थे। दरअसल, कमरा संख्या 21 के कुछ अभ्यर्थी परीक्षा शुरू होने से ऐन पहले किसी भ्रम (कन्फ्यूजन) के कारण कमरे से बाहर निकल आए थे। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और अधिकारियों ने तुरंत उनके भ्रम को दूर किया और उन्हें वापस उनकी सीट पर बैठाया। पेपर लीक की खबर महज एक कोरी अफवाह थी।

बुलंदशहर में धरा गया संदिग्ध, AI और हाईटेक कमांड रूम से हुई तीसरी आंख की निगरानी

भर्ती परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस बार प्रशासन ने तकनीक का तगड़ा इस्तेमाल किया। इसी चौकसी का नतीजा रहा कि बुलंदशहर के जहांगीराबाद स्थित शिवकुमार अग्रवाल जनता इंटर कॉलेज केंद्र पर एक संदिग्ध अभ्यर्थी को दबोच लिया गया। बायोमीट्रिक और आधार डाटा का मिलान न होने पर केंद्र व्यवस्थापक ने उसे तुरंत स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया, जहां उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है।

सभी परीक्षा केंद्रों के कमरों को जिला मुख्यालयों और आयोग मुख्यालय पर बने विशेष कंट्रोल कमांड रूम से सीधे जोड़ा गया था, जहां से लाइव सीसीटीवी फीड के जरिए हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी गई। किसी भी तरह की ‘मुन्नाभाई’ (सॉल्वर गैंग) गतिविधियों को नेस्तनाबूद करने के लिए इस बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फेशियल रिकग्निशन और बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन का कड़ा प्रयोग किया गया था। शासन स्तर पर तैनात भारी पुलिस बल और सचल दस्तों (फ्लाइंग स्क्वाड) की मुस्तैदी के चलते अफवाह फैलाने वालों और नकल माफियाओं के मंसूबे पूरी तरह नाकाम रहे।

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