
लखनऊ । इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पार्षद को शपथ नहीं दिलाने पर लखनऊ मेयर के प्रशासनिक-वित्तीय अधिकार को फ्रीज कर दिया है। अगर इसके बाद भी मेयर शपथ नहीं दिला सकीं तो जिलाधिकारी या नगर आयुक्त उनका काम संभालेंगे।
जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस कमर हसन रिजवी की बेंच ने गुरुवार को यह आदेश पारित किया है। इस मामले में हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट गौरव मेहरोत्रा ने बहस की। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में लखनऊ मेयर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार फ्रीज कर दिए।
हाईकोर्ट ने लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद पर निर्वाचित घोषित करने के पांच महीने बाद भी अब तक शपथ नहीं दिलाने के कारण लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार को सीज कर दिया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जब तक कोर्ट से निर्वाचित घोषित पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक मेयर के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज रहेंगे। हाईकोर्ट ने यह निर्णय अपने आदेश का पालन न होने पर सुनाया है। मेयर पक्ष हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत पाने में असफल रहा। इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं किया गया।
उल्लेखनीय है कि वॉर्ड-73 फैजुल्लागंज से पूर्व पार्षद प्रदीप कुमार शुक्ला का निर्वाचन रद्द होने के बाद सत्र न्यायालय/चुनाव न्यायाधिकरण ने 19 दिसंबर 2025 को ललित किशोर तिवारी को निर्वाचित पार्षद घोषित किया था। निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी को लगभग 05 महीने तक शपथ नहीं दिलाई। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। शपथ दिलाने का निर्देश जारी हुआ। मगर अनुपालन नहीं हुआ और फिर आज यह निर्णय आया है।









