झांसी का सबसे सनसनीखेज हत्याकांड: जमीन कारोबारी संजय वर्मा फायरिंग केस में 8 को उम्रकैद, 13.90 लाख का जुर्माना, 8 आरोपी बरी

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सबसे चर्चित और सनसनीखेज जमीन कारोबारी संजय वर्मा फायरिंग व उनके गनर जय गोस्वामी हत्याकांड में अदालत ने करीब 7 साल 10 महीने बाद अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। न्यायालय एडीजे विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 मुख्य अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने इन दोषियों पर कुल 13 लाख 90 हजार रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड भी लगाया है। इस फैसले से जहां पीड़ित परिवार को लंबे समय बाद न्याय मिला है, वहीं साक्ष्यों के अभाव में लकारा निवासी सरदार सिंह गुर्जर सहित 8 अन्य आरोपियों को अदालत ने बरी कर दिया है।

कचहरी के पास दिनदहाड़े बरसाई थीं गोलियां, दहल उठा था झांसी

झांसी में 21 जुलाई 2018 को हुए इस खूनी खेल ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। सरकारी वकील (एडीजीसी) देवेंद्र कुमार पांचाल के मुताबिक, कोतवाली थाना क्षेत्र के बड़ाबाजार स्थित वासुदेव मोहल्ले के रहने वाले सचिन वर्मा ने नवाबाद थाने में इस वारदात की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनके पिता और नामचीन जमीन कारोबारी संजय वर्मा 21 जुलाई 2018 को कोर्ट में एक मामले की तारीख पर गए थे। उनके साथ सुरक्षा के लिए गनर जय गोस्वामी, रवि कुमार और सुनील कुशवाहा भी मौजूद थे। कोर्ट की कार्यवाही के बाद जैसे ही सभी लोग अपनी गाड़ी में सवार होकर घर वापस लौट रहे थे, तभी कचहरी चौराहे के पास घात लगाए बैठे हमलावरों ने उनकी गाड़ी पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।

सीट के नीचे छिपकर बची थी कारोबारी की जान, गनर की हुई थी मौत

इस दुस्साहसिक हमले में बदमाशों ने संजय वर्मा को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। संजय वर्मा ने सूझबूझ दिखाते हुए गाड़ी की सीटों के बीच छिपकर अपनी जान बचाई, लेकिन इस गोलीबारी में उनके अंगरक्षक (गनर) जय गोस्वामी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं संजय वर्मा, रवि और सुनील गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड और फायरिंग से पूरे इलाके में दहशत फैल गई और देखते ही देखते आसपास के दुकानदारों ने अपनी दुकानें धड़ाधड़ बंद कर दीं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और नवाबाद पुलिस फौरन मौके पर पहुंचे। पुलिस ने गनर जय गोस्वामी के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और घायलों को इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था।

इन 8 खूंखार दोषियों को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

नवाबाद पुलिस ने इस मामले में नामजदगी और तफ्तीश के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। लंबी कानूनी बहस और गवाहों के बयानों के बाद अदालत ने निम्नलिखित 8 आरोपियों को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा का एलान किया:

  • सोनू गैंड़ा उर्फ सचिन गुप्ता

  • रिंकू गैंड़ा उर्फ मनीष गुप्ता

  • बॉबी गैंड़ा उर्फ संदीप गुप्ता

  • प्रहलाद

  • राजेंद्र सिंह गुर्जर

  • भूपेंद्र सिंह उर्फ पुष्पेंद्र सिंह गुर्जर

  • कमलेश यादव

  • ऊधम सिंह गुर्जर

अदालत ने प्रत्येक दोषी को धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास और 1-1 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न भरने पर 1 साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा धारा 307/149 में 10 साल का सश्रम कारावास व 50 हजार जुर्माना, धारा 147 में 2 साल की सजा व 5 हजार जुर्माना, धारा 148 में 3 साल की सजा व 10 हजार जुर्माना और धारा 506 में 5 साल के सश्रम कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि इस सजा में समायोजित की जाएगी।

साक्ष्यों की कमी के चलते ये 8 आरोपी हुए बरी

इस हाईप्रोफाइल केस की लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष जिन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाया, उन्हें अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। बरी होने वाले आरोपियों में सरदार सिंह गुर्जर, सनम, सागर, रोहतास, गौरव उर्फ मोंटी, नितेश कुमार पटवारी, राव राजा और भारत सिंह शामिल हैं।

सीबीसीआईडी तक पहुंची थी जांच, छावनी में तब्दील रही कचहरी

यह मामला अपने समय का झांसी का सबसे बड़ा और सनसनीखेज आपराधिक कांड था। स्मार्ट सिटी झांसी में दिनदहाड़े गनर की हत्या और कारोबारी पर हुए इस हमले की गूंज शासन स्तर तक हुई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी विवेचना दूसरे जिले की पुलिस और बाद में सीबीसीआईडी (CBCID) से भी कराई गई थी। फैसले के दिन किसी भी प्रकार के बवाल की आशंका को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबीजीटीएस मूर्ति के कड़े निर्देशन में सीओ सिटी लक्ष्मीकांत गौतम और नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव समेत भारी पुलिस बल सुबह से ही कचहरी परिसर में तैनात रहा।

इन्होंने निभाई न्याय दिलाने में अहम भूमिका

संजय वर्मा फायरिंग कांड में पीड़ितों को न्याय दिलाने और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने में अभियोजन टीम ने बेहद मजबूत पैरवी की। इस पैरवी टीम में मुख्य रूप से एडीजीसी देवेंद्र कुमार पांचाल, विवेचक निरीक्षक जितेंद्र सिंह चंदेल, कोर्ट मुहर्रिर नीरज कुमार, पैरोकार बिपिन कुमार और शिव कुमार शामिल रहे, जिनकी सधी हुई दलीलों के कारण दोषियों को सख्त सजा मिल सकी।

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