लखनऊ। अयोध्या के भव्य श्रीराम मंदिर में हुए बहुचर्चित चढ़ावा चोरी और गबन प्रकरण की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक और बेहद गोपनीय जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी है। मंगलवार को गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी गई इस 20 पन्नों की रिपोर्ट ने राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर हड़कंप मचा दिया है। एसआईटी ने न सिर्फ सुरक्षा और प्रबंधन के जिम्मेदारों पर तीखे सवाल उठाए हैं, बल्कि मामले में शामिल दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कराने, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन और किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मंदिर का मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की बड़ी सिफारिश की है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की इस प्रारंभिक रिपोर्ट की आंच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव और मुख्य व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव ‘टिन्नू’ समेत कुल 14 बड़े पदाधिकारियों और रसूखदारों पर आ सकती है।
केवल कैश नहीं, भक्तों के सोने-चांदी के आभूषण भी गायब
एसआईटी की अब तक की तफ्तीश में जो सबसे चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, वो यह कि मंदिर से सिर्फ नकदी (कैश) ही चोरी नहीं हुई है, बल्कि देश-विदेश के भक्तों द्वारा प्रभु श्रीराम को श्रद्धा से दान किए गए कीमती सोने-चांदी के आभूषण भी गायब कर दिए गए हैं। जांच टीम ने इस आभूषण चोरी को भी अपनी रिपोर्ट का मुख्य हिस्सा बनाया है। रिपोर्ट में चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया, लचर निगरानी व्यवस्था, ट्रस्ट के कुछ रसूखदार पदाधिकारियों और संबंधित बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
150 लोगों से हुई पूछताछ, बयानों और सरकारी दस्तावेजों में भारी हेरफेर
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का यह संगीन मामला बीती 7 जून को सुर्खियों में आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के ही अनुरोध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 13 जून को लखनऊ के मंडलायुक्त डॉ. विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय हाई-लेवल एसआईटी का गठन किया था। 15 जून से मैदान में उतरी एसआईटी ने सरकार के निर्देशानुसार महज 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है।
इस दौरान जांच टीम ने ट्रस्ट और बैंक से जुड़े मुख्य आरोपियों समेत करीब 150 लोगों से कड़ी पूछताछ की है। हैरान करने वाली बात यह है कि पूछताछ के दौरान दर्ज कराए गए कई वीआईपी और कर्मचारियों के बयान, ट्रस्ट के पास उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेजों और अभिलेखों से मेल ही नहीं खा रहे हैं। बयानों में दिख रहे इस भारी विरोधाभास को देखते हुए एसआईटी आने वाले दिनों में जांच का दायरा और ज्यादा बढ़ाने की तैयारी में है।
2 करोड़ रुपये हो चुके हैं बरामद, सेवादारों को पहले से थी पाप की भनक
इस पूरे घोटाले में मुख्य आरोपी लवकुश, अविनाश, अनुकल्प, करुणेश और रामशंकर उर्फ टिन्नू की निशानदेही पर अब तक दो करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम बरामद की जा चुकी है। जांच में सामने आया है कि दानपात्रों की मुख्य चाभियां रामशंकर उर्फ टिन्नू के पास ही रहती थीं। सबसे शर्मनाक बात यह है कि मंदिर में तैनात कई सेवादारों को इस गबन और चोरी की जानकारी बहुत पहले से थी, लेकिन उन्होंने इस पर चुप्पी साधे रखी। इसके अलावा रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी से लेकर बैंक जमा में कमीशनखोरी तक के पुख्ता साक्ष्य जुटाए गए हैं। इस पूरे खेल में 25 से 30 लोगों की सीधी भूमिका सामने आ रही है।
एसआईटी की कड़क सिफारिशें: सीसीटीवी बैकअप हो 180 दिन, आरोपी नहीं छोड़ेंगे अयोध्या
राम मंदिर की सुरक्षा और मर्यादा को अक्षुण्ण रखने के लिए एसआईटी ने शासन को कुछ बेहद कड़े सुझाव दिए हैं:
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मंदिर के पूरे वित्तीय प्रबंधन के लिए पेशेवर और कॉर्पोरेट तरीका अपनाया जाए।
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दान में आने वाली हर राशि का प्रतिदिन एंट्री सिस्टम हो और साप्ताहिक रूप से इसका स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।
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बिना सघन तलाशी के मंदिर कर्मियों की आवाजाही पर पूर्ण रोक लगे।
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सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का डेटा स्टोरेज बैकअप 45 दिनों से बढ़ाकर अनिवार्य रूप से 180 दिन (6 महीने) किया जाए।
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जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक सभी नामजद आरोपी और संदेही अयोध्या छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे।
दिल्ली दरबार पहुंचेगी रिपोर्ट, गृह मंत्रालय तय करेगा किसका पत्ता कटेगा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसआईटी के अध्यक्ष ने पुष्टि की है कि यह गोपनीय रिपोर्ट गृह विभाग को दे दी गई है। राज्य सरकार इस रिपोर्ट को जल्द से जल्द केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भेजने जा रही है। चूंकि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार के स्तर पर हुआ है, इसलिए अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ही यह अंतिम फैसला लेगा कि चंपत राय समेत किन-किन विवादित सदस्यों को ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।















