व्यतिपात योग 2026: 10 जुलाई को लगेगा अशुभ योग, इन 5 राशियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानें क्या करें और क्या न करें

लखनऊ। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में जहां कुछ योगों को बेहद शुभ और मंगलकारी माना जाता है, वहीं कुछ विशेष योग ऐसे भी होते हैं जिन्हें बेहद प्रभावशाली लेकिन नकारात्मक माना जाता है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण और अशुभ योग आगामी 10 जुलाई 2026 को बनने जा रहा है, जिसे ज्योतिष विज्ञान में ‘व्यतिपात योग’ (Vyatipat Yoga) कहा जाता है।

वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा की एक विशेष स्थिति के कारण निर्मित होने वाला यह योग मानसिक तनाव, भ्रम, बनते कामों में अड़चन और अनचाही पारिवारिक व आर्थिक परेशानियों का कारण बन सकता है। द्रिक पंचांग (Drik Panchang) के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 को यह योग सुबह 6:53 बजे से शुरू होकर दोपहर 12:27 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि के दौरान 5 राशि के जातकों को अपने करियर, सेहत और धन के मामलों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

1. वृषभ राशि: अचानक बढ़ेगा खर्चों का बोझ, निवेश से बचें

वृषभ राशि के जातकों के लिए व्यतिपात योग का यह समय आर्थिक रूप से काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इस दौरान अचानक कुछ ऐसे अनपेक्षित खर्चे आपके सामने आ सकते हैं, जिनकी आपने पहले से कोई योजना नहीं बनाई होगी, जिससे आपका मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है। इस अवधि में किसी भी तरह के नए निवेश, शेयर मार्केट या जोखिम भरे वित्तीय फैसलों से दूरी बनाना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। परिवार या किसी करीबी रिश्तेदार के मांगलिक कार्यक्रम में शामिल न हो पाने के कारण कुछ लोग आपसे नाराज हो सकते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ेगा। सेहत के लिहाज से आपको आंखों से जुड़ी कोई छोटी-मोटी तकलीफ परेशान कर सकती है।

2. मिथुन राशि: जल्दबाजी में लिया फैसला कराएगा बड़ा नुकसान

मिथुन राशि के लोगों को इस समय हर एक कदम फूंक-फूंक कर रखने की सलाह दी जाती है। नौकरीपेशा या बिजनेस करने वाले जातक किसी भी महत्वपूर्ण और कानूनी दस्तावेज (डॉक्यूमेंट्स) पर बिना पढ़े या बिना पूरी जानकारी के हस्ताक्षर (साइन) न करें। व्यापारिक सौदों में जल्दबाजी करना आपको भारी वित्तीय नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ ही कार्यस्थल और घर में बातचीत के दौरान अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और शब्दों का चयन बेहद सोच-समझकर करें, अन्यथा एक छोटी सी बात बड़े विवाद का रूप ले सकती है।

3. सिंह राशि: वर्कप्लेस पर बढ़ेगा प्रेशर, रिश्तों में आ सकती है तल्खी

सिंह राशि के जातकों को इस अशुभ योग के प्रभाव से मानसिक तनाव और कामकाज का अत्यधिक दबाव झेलना पड़ सकता है। ऑफिस में अचानक जिम्मेदारियां बढ़ने से आप शारीरिक थकान और चिंता का अनुभव करेंगे। कार्यस्थल पर अपने सीनियर अधिकारियों या सहकर्मियों (सहयोगियों) के साथ तालमेल बिठाने में आपको थोड़ी मुश्किल आ सकती है। वहीं, आपके निजी जीवन में भी जीवनसाथी या पार्टनर के साथ रिश्तों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ सकती है। खुद को शांत रखें और इस समय किसी भी तरह की अनावश्यक बहस और कड़वे विवादों से दूरी बनाए रखें।

4. कुंभ राशि: प्रॉपर्टी की डील और बड़े निवेश को फिलहाल टालें

कुंभ राशि के जातकों के लिए यह ज्योतिषीय समय बड़े और महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णयों को रोकने का स्पष्ट संकेत दे रहा है। यदि आप किसी नई बिजनेस डील, नए प्रोजेक्ट की शुरुआत या बड़ा निवेश करने जा रहे हैं, तो उसे कुछ समय के लिए टालना ही आपके लिए फायदेमंद रहेगा। जमीन, मकान, प्लॉट या नया वाहन खरीदने और बेचने से जुड़े फैसलों में बिल्कुल भी जल्दबाजी न दिखाएं। परिवार के सदस्यों के साथ वैचारिक मतभेद या विचारों का टकराव बढ़ सकता है, इसलिए धैर्य और समझदारी से काम लें।

5. मकर राशि: सेहत में आ सकती है गिरावट, किसी को न दें उधार

मकर राशि के जातकों को इस विशेष अवधि में अपने धन के साथ-साथ अपने स्वास्थ्य पर भी दोहरा ध्यान देने की जरूरत है। इस योग के प्रभाव से आपको शारीरिक कमजोरी, अत्यधिक थकान या कान व गले से जुड़ी किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। आर्थिक मामलों की बात करें तो इस दौरान किसी भी अनजान या करीबी व्यक्ति को बड़ी रकम उधार (लोन) देने से बचें, अन्यथा आपका पैसा लंबे समय के लिए फंस सकता है। वित्तीय मामलों में बरती गई सतर्कता ही आपको भविष्य के संकटों से बचाएगी।

व्यतिपात योग के दौरान क्या करें और क्या न करें?

भूलकर भी क्या न करें (वर्जित कार्य):

ज्योतिषीय मान्यताओं और वास्तु नियमों के अनुसार, व्यतिपात योग की अवधि में किसी भी नए, शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। इस दौरान गृह प्रवेश, सगाई या विवाह की बात पक्की करना, नए व्यापार या दुकान का उद्घाटन करना या कोई भी नया संकल्प लेना पूरी तरह वर्जित माना जाता है।

इस दौरान क्या करना रहेगा शुभ (उपाय):

इस अशुभ योग के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए अपने मन को शांत रखने पर विशेष ध्यान दें। इस समय अवधि में ध्यान (मेडिटेशन), महामृत्युंजय मंत्र का जाप, भगवान शिव और सूर्य देव की पूजा-पाठ तथा जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना बेहद फलदायी और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है। अपने इष्ट देव का स्मरण करने से मानसिक संतुलन बना रहता है।

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