राम मंदिर चंदा कांड: मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला 13 घंटे की पुलिस रिमांड पर; शौचालय को बनाया था ‘सेफ हाउस’, 20 लाख कैश और विदेशी करेंसी बरामद

अयोध्या अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की सनसनीखेज चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) का एक्शन लगातार तेज होता जा रहा है। स्थानीय अदालत ने इस महा-घोटाले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को 13 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड पर मंजूर कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिमांड की इस सीमित अवधि के दौरान आरोपी अविनाश से चोरी की गई बाकी रकम की बरामदगी, इस काले धंधे में शामिल उसके अन्य सहयोगियों और चुराए गए धन के इस्तेमाल से जुड़े कई बेहद गोपनीय और अहम पहलुओं पर सघन पूछताछ की जाएगी।

सबसे बड़ी रिकवरी: 20 लाख कैश, विदेशी मुद्रा और सोने के आभूषण जब्त

जांच एजेंसियों से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड में अब तक की सबसे बड़ी और रिकॉर्ड तोड़ बरामदगी अविनाश शुक्ला के पास से ही हुई है। पुलिस ने आरोपी अविनाश की निशानदेही पर उसके ठिकानों से करीब 20 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी, विभिन्न देशों की विदेशी मुद्रा (फॉरेन करेंसी), सोने के कीमती आभूषण और कई अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किए हैं। पुलिस अब इन पैसों और आभूषणों को मुख्य केस प्रॉपर्टी (साक्ष्य) मानकर पूरे वित्तीय लेनदेन और बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

रेकी कर समझा सुरक्षा चक्र, मंदिर के ‘शौचालय’ को बनाया नोट छिपाने का अड्डा

पूछताछ में जो सबसे चौंकाने वाला और शर्मनाक सच सामने आया है, उसने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने रामलला के दरबार में चोरी करने से पहले बकायदा कई दिनों तक रेकी की थी। उन्होंने मंदिर परिसर के भीतर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के एंगल, सुरक्षाकर्मियों की रोटेशन ड्यूटी (गतिविधियों) और पूरे सिक्योरिटी ग्रिड का गहराई से अध्ययन किया था, ताकि वे कैमरों की नजर से बच सकें।

इससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी दानपात्र से चढ़ावे की गिनती (कैलकुलेशन) के दौरान नजर बचाकर नकदी पार करते थे और उस चोरी की रकम को तुरंत बाहर ले जाने के बजाय मंदिर परिसर के भीतर बने शौचालयों (Toilets) में छिपा देते थे। बाद में स्थिति सामान्य होने पर वे धीरे-धीरे उस नकदी को छोटे-छोटे हिस्सों में मंदिर परिसर से बाहर निकाल लेते थे। पुलिस इन दावों की वैज्ञानिक और भौतिक (Physical Verification) पुष्टि के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटा रही है।

SIT को मिला अतिरिक्त समय, कई और रसूखदारों पर गिरेगी गाज

इस महा-विवाद की संवेदनशीलता और जांच के बढ़ते दायरे को देखते हुए उत्तर प्रदेश शासन द्वारा मामले की कमान संभाल रही विशेष जांच दल (SIT) को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए अतिरिक्त समय (Extention) दे दिया गया है। एसआईटी अब न केवल आरोपियों बल्कि मंदिर प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों, आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के प्रभारियों और दान गणना की निगरानी करने वाले बैंक कर्मियों की भूमिका की भी सूक्ष्मता से जांच कर रही है। अधिकारियों का साफ कहना है कि कस्टडी रिमांड के दौरान मिलने वाले इनपुट और एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी भी अन्य रसूखदार या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ बिना किसी नरमी के सीधे जेल भेजने की विधिक कार्रवाई की जाएगी।

 

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