नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनके गोचर को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनसे बनने वाले शुभ-अशुभ योग सीधे तौर पर मानव जीवन को प्रभावित करते हैं. इसी कड़ी में 6 जुलाई 2026 की सुबह ब्रह्मांड में एक ऐसी खगोलीय और ज्योतिषीय घटना हुई है, जिसने पंडितों और ज्योतिषियों की चिंता बढ़ा दी है. सोमवार सुबह जैसे ही चंद्रमा ने मीन राशि में प्रवेश किया, वैसे ही आकाशमंडल में बेहद कष्टकारी और अशुभ माने जाने वाले ‘विष योग’ (Vish Yog) का निर्माण हो चुका है.
दरअसल, न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनिदेव पहले से ही मीन राशि में विराजमान हैं. ऐसे में मीन राशि में चंद्रमा और शनि की इस युति ने हलचल तेज कर दी है. ज्योतिष शास्त्र में विष योग को मानसिक तनाव, कार्यों में व्यवधान, बनते काम बिगड़ना और भारी आर्थिक तंगी देने वाला माना गया है. आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह विष योग क्या है, इसे इतना खतरनाक क्यों माना जाता है और इस बार मेष, सिंह और तुला राशि वालों के जीवन में यह क्या उथल-पुथल मचाने वाला है.
आखिर क्या होता है ज्योतिष में ‘विष योग’?
कुंडली या गोचर में जब मन के कारक चंद्रमा और क्रूर व न्याय प्रिय ग्रह शनि एक ही राशि में एक साथ आकर बैठ जाते हैं, तो इस युति को ‘विष योग’ कहा जाता है. ज्योतिषीय विज्ञान के अनुसार, चंद्रमा हमारे मन, कोमल भावनाओं, मानसिक शांति, माता और संवेदनशीलता का प्रतिनिधित्व करते हैं. वहीं दूसरी ओर, शनिदेव कर्म, कड़े संघर्ष, धैर्य, बड़ी जिम्मेदारियों और कठिन परीक्षाओं के कारक हैं. जब इन दोनों एकदम विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों का मिलन होता है, तो व्यक्ति के मस्तिष्क और विचारों पर भारी दबाव बढ़ने लगता है. ऐसी स्थिति में जातक भ्रम का शिकार हो जाता है, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है, आत्मविश्वास डगमगा जाता है और हर काम में अप्रत्याशित देरी होने लगती है.
जानिए क्यों इसे माना जाता है सबसे अशुभ और कष्टकारी योग?
ज्योतिषियों के मुताबिक, चंद्रमा और शनि का मूल स्वभाव एक-दूसरे से पूरी तरह जुदा है. चंद्रमा जहां पानी की तरह शांत, शीतल, कोमल और भावुकता से भरा है, वहीं शनिदेव आग और लोहे की तरह कठोर अनुभवों, कड़े अनुशासन और लंबे संघर्ष के जरिए इंसान को तपाते हैं. जब चंद्रमा रूपी मन पर शनि का कठोर प्रभाव पड़ता है, तो इंसान के भीतर दुविधा, गहरी चिंता, अकेलापन, निराशा और भयंकर भावनात्मक उतार-चढ़ाव (Mood Swings) पैदा होने लगते हैं. इस योग के प्रभाव से जातक को महसूस होता है कि उसके काम बनते-बनते ऐन वक्त पर रुक रहे हैं. उसकी बनाई योजनाएं ठप हो जाती हैं और वह छोटी-छोटी बातों पर अवसाद (Depression) या तनाव महसूस करने लगता है. हालांकि, यह प्रभाव सभी पर एक जैसा नहीं होता.
मेष राशि पर विष योग का असर: खर्चों की सुनामी और मानसिक तनाव
मेष राशि के जातकों के लिए मीन राशि में बना यह विष योग मानसिक रूप से काफी परेशानी खड़ा करने वाला साबित हो सकता है. इस अवधि में आपके खर्चों में अचानक भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे आपका बजट पूरी तरह बिगड़ सकता है. आपके कई महत्वपूर्ण कार्य उम्मीद के मुताबिक पूरे नहीं होंगे, जिससे आपके भीतर झुंझलाहट बढ़ेगी. कार्यक्षेत्र (Job & Business) में उच्च अधिकारियों से मनमुटाव हो सकता है, इसलिए इस समय बेहद धैर्य और संयम बनाए रखना आपके लिए सबसे बड़ा हथियार साबित होगा.
सिंह राशि वालों को चेतावनी: निवेश से बचें और अपनी जुबान पर रखें लगाम
सिंह राशि के लोगों के लिए यह गोचर काल आर्थिक मामलों में बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखने का है. ज्योतिष की सलाह है कि इस दौरान किसी भी तरह के बड़े निवेश (Investment), शेयर बाजार या लॉटरी सट्टे से पूरी तरह दूरी बना लें. इस समय किसी भी करीबी या बाहरी व्यक्ति पर आंख बंद करके भरोसा करना आपको कंगाली की कगार पर ला सकता है. इसके अलावा परिवार और कार्यस्थल पर अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखें, अन्यथा विवाद बढ़ सकता है.
तुला राशि के लिए मुश्किलें: बढ़ता काम का बोझ और सेहत में गिरावट
तुला राशि के जातकों के लिए यह समय वर्कलोड (Work Pressure) को बहुत ज्यादा बढ़ाने वाला रहेगा. आपको अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां किसी बड़े बोझ की तरह महसूस हो सकती हैं, जिससे मानसिक थकान रहेगी. सबसे जरूरी बात यह है कि इस अवधि में आपको अपनी सेहत को लेकर रत्ती भर भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. पेट, आंखों या पैरों में तकलीफ हो सकती है. अपने खानपान को दुरुस्त रखें, पूरी नींद लें और एक अनुशासित दिनचर्या का पालन करें.
विष योग के खतरनाक प्रभाव से बचने के लिए क्या करें और क्या न करें?
ज्योतिषीय मान्यताओं और पुराणों के अनुसार, विष योग की अवधि को शांति से काटने के लिए जातक को अपने भीतर धैर्य और संयम को बढ़ाना चाहिए. इस दौरान लाइफ का कोई भी बड़ा या महत्वपूर्ण फैसला जल्दबाजी या भावुकता में आकर बिल्कुल न लें. अपने भीतर नकारात्मक सोच और क्रोध को पनपने न दें. इस अशुभ योग के प्रभाव को कम करने के लिए नियमित रूप से ध्यान (Meditation), शिव जी की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप या शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करना मानसिक शांति बनाए रखने में अचूक औषधि की तरह काम करता है.
क्या सभी लोगों पर समान रूप से कहर बरपाता है यह योग?
अक्सर लोगों के मन में यह डर बैठ जाता है कि विष योग बनते ही अनहोनी हो जाएगी, लेकिन ज्योतिष के नियम कहते हैं कि किसी भी ग्रह योग का प्रभाव केवल राशि के आधार पर शत-प्रतिशत तय नहीं होता. व्यक्ति पर इसका कितना असर होगा, यह उसकी व्यक्तिगत जन्म कुंडली, कुंडली में चंद्रमा और शनि की वास्तविक स्थिति, वर्तमान में चल रही महादशा-अंतर्दशा और अन्य शुभ ग्रहों की दृष्टि पर निर्भर करता है. यही वजह है कि मुमकिन है कि किसी एक व्यक्ति पर इस विष योग का बहुत घातक असर हो, जबकि उसी राशि के दूसरे व्यक्ति पर इसका प्रभाव नाममात्र या बिल्कुल भी न दिखाई दे.













