
Jalaun : जनपद के ऐतिहासिक एवं पावन पंचनद धाम में प्रदेश के मा0 जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जी ने पांच पवित्र नदियों यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी एवं पहुज की भव्य प्रतिमाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने पंचनद की पुण्यभूमि को नमन करते हुए कहा कि आज का दिन केवल प्रतिमाओं के अनावरण का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और जल संरक्षण के राष्ट्रीय संकल्प का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज की त्रिवेणी की तरह पंचनद भी प्रकृति का अद्भुत चमत्कार है, जहां पांच पवित्र नदियां एक साथ मिलकर भारत की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक विरासत का अनुपम स्वरूप प्रस्तुत करती हैं।
उन्होंने कहा कि सदियों से वेदों और पुराणों में जिन नदियों की महिमा का वर्णन किया गया, आज उनकी प्रतिमाओं की स्थापना जन-जन को जल और प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों का स्मरण कराएगी। मा0 जल शक्ति मंत्री जी ने कहा कि भारत की संस्कृति में नदियों को कभी मात्र जलधारा नहीं माना गया, बल्कि उन्हें मां का स्वरूप दिया गया है। ऋग्वेद और अथर्ववेद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जल जीवन, आनंद और समस्त सृष्टि का आधार है तथा पृथ्वी हमारी माता है तो उसकी गोद में बहने वाली नदियां हमारी जीवनदायिनी माताएं हैं। गंगा ने हमें आध्यात्मिकता, यमुना ने भक्ति, सरस्वती ने ज्ञान, गोदावरी ने तपस्या और नर्मदा ने साधना का संदेश दिया है।

पंचनद हमें विविधता में एकता का ऐसा संदेश देता है, जहां अलग-अलग दिशाओं से आने वाली नदियां अपनी पहचान खोए बिना एक बड़े उद्देश्य के लिए एक हो जाती हैं और यही भारत की सांस्कृतिक शक्ति है।उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जल संकट पर चिंतित है, लेकिन भारत हजारों वर्षों पुरानी उस परंपरा को पुनर्जीवित कर रहा है जिसमें जल को केवल संसाधन नहीं, बल्कि संस्कार माना गया है। यदि जल को उपभोग की वस्तु माना जाएगा तो संकट बढ़ेगा, लेकिन यदि उसे परिवार का सदस्य समझा जाएगा तो उसका संरक्षण स्वतः होगा। इसी सोच के साथ मा0 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कैच द रेन, जल शक्ति अभियान, अमृत सरोवर तथा जल जीवन मिशन जैसे अभियान देशभर में जनआंदोलन बने हैं।
वहीं मा0 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में जल संरक्षण को शासन की योजना नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान बनाया गया है, जिसका मूल संकल्प “हर घर जल और हर खेत को पानी” है।उन्होंने कहा कि एक समय था जब बुंदेलखंड की पहचान केवल सूखे और पेयजल संकट से होती थी, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। लगभग 99.79 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंच चुका है और बुंदेलखंड पूर्ण “हर घर जल” की ओर अग्रसर है। जिन क्षेत्रों में कभी आर्सेनिक, फ्लोराइड, आयरन और नाइट्रेट जैसे तत्व लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए थे, वहां अब सतही जल आधारित पाइपलाइन नेटवर्क और आधुनिक जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे जलजनित रोगों और दिमागी बुखार जैसी गंभीर समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आई है।
मा0 जल शक्ति मंत्री जी ने कहा कि सरकार के व्यापक जल संरक्षण प्रयासों के परिणामस्वरूप बुंदेलखंड के अनेक ब्लॉक, जो कभी डार्क जोन घोषित थे, अब सुरक्षित श्रेणी में लौट रहे हैं। मानसून के बाद भूजल स्तर में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है तथा रिचार्ज संरचनाओं के कारण गर्मी के मौसम में भी कुओं और हैंडपंपों में पानी उपलब्ध रह रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा 15 हजार से अधिक अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं, जिनमें से 6200 से अधिक बुंदेलखंड के सात जिलों में निर्मित या पुनर्जीवित किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 5800 से अधिक चेकडैम बनाए गए हैं तथा सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से लगभग ढाई लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई से जोड़ा गया है, जिससे जल की 40 से 50 प्रतिशत तक बचत हो रही है।उन्होंने कहा कि पंचनद क्षेत्र केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है।

यहां चंबल और सिंध नदियों का स्वच्छ जल दुर्लभ गंगा डॉल्फिन और घड़ियाल जैसे वन्य जीवों का सुरक्षित आवास है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि सभी लोग नदियों को प्रदूषण से मुक्त रखने, जल की प्रत्येक बूंद को प्रसाद समझकर बचाने तथा वृक्षारोपण और जल संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लें। यही इन पवित्र नदियों की सच्ची पूजा और सनातन संस्कृति के प्रति वास्तविक श्रद्धा होगी। मा0 जल शक्ति मंत्री जी ने उत्तर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की 64 छोटी-बड़ी नदियों का सफल पुनर्जीवन किया जा चुका है तथा वर्षों से विलुप्त हो चुकी 110 नहरों को पुनर्जीवित किया गया है। “एक जनपद-एक नदी” अभियान के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक विलुप्त या प्रदूषित नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य आधुनिक तकनीकों, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन मैपिंग तथा आईआईटी कानपुर, बीएचयू और रुड़की जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक सहयोग से किया जा रहा है।
कानपुर की नून नदी, पीलीभीत की गोमती, बुलंदशहर की नीम नदी, संभल की सोत नदी, रामपुर की मौसमी नदियों, बिजनौर की मालिन तथा श्रावस्ती की बूढ़ी राप्ती सहित अनेक नदियों के पुनर्जीवन से सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत प्रदेश में 152 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं, 6627 से अधिक चेकडैम बनाए गए हैं, 1417 से अधिक तालाबों का निर्माण कराया गया है तथा 34 हजार से अधिक सरकारी भवनों पर रूफटॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। पिछले वर्षों में 29 जनपदों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2017 के बाद सिंचाई क्षमता 82 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 105 लाख हेक्टेयर तक पहुंची है। प्रदेश में 3869 किलोमीटर लंबे 523 तटबंधों के माध्यम से लाखों हेक्टेयर भूमि को बाढ़ से सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण हेतु विभिन्न परियोजनाओं पर तेजी से कार्य किया जा रहा है तथा राष्ट्रीय नदी डॉल्फिन रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 2397 डॉल्फिन दर्ज होना इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश की नदियों का इकोसिस्टम लगातार बेहतर हो रहा है। मा0 जल शक्ति मंत्री जी ने कहा कि जब तक राजशक्ति के साथ जनशक्ति नहीं जुड़ेगी, तब तक कोई भी संकल्प पूर्ण नहीं हो सकता। उन्होंने सभी नागरिकों से जल संरक्षण, नदी संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और वृक्षारोपण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए जल की प्रत्येक बूंद और प्रत्येक नदी की रक्षा करना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष घनश्याम अनुरागी, माधौगढ़ विधायक मूलचंद निरंजन, कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, जल शक्ति मंत्री के प्रतिनिधि अरविंद चौहान, जिलाधकारी राजेश कुमार पाण्डेय, पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह, परमार्थ संस्था से संजय कुमार, वरुण आदि सहित सम्बंधित अधिकारी व जनप्रतिधि व बड़ी सख्यां में जल सहेली आदि मौजूद रहे।









