अयोध्या। भव्य राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में गिरफ्तार किए गए दो मुख्य आरोपियों—रमाशंकर मिश्रा और सुभाष श्रीवास्तव—से पुलिस की पहले दौर की रिमांड पूछताछ पूरी हो चुकी है। बुधवार की सुबह ठीक 8 बजे अयोध्या पुलिस दोनों आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से रिमांड पर लेकर फैजाबाद पुलिस लाइन पहुंची। यहां पुलिस के आला अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों से अलग-अलग कमरों में बैठाकर बेहद कड़ाई से पूछताछ की गई। सुबह से शुरू हुआ यह सवाल-जवाब का सिलसिला लगातार 13 घंटे तक चला, जिसके बाद रात 9 बजे दोनों को वापस जेल भेज दिया गया।
पुलिस की ‘स्पेशल चेकलिस्ट’ ने बढ़ाई मुश्किलें, अलग-अलग तैयार किए गए थे सवाल
चोरी की इस बड़ी साजिश की तह तक जाने के लिए अयोध्या पुलिस ने पूरी तैयारी कर रखी थी। जांच टीम ने रमाशंकर और सुभाष, दोनों के लिए अलग-अलग सवालों की एक लंबी ‘चेकलिस्ट’ तैयार की थी।
पूछताछ में मिली लीड के आधार पर पुलिस आरोपी रमाशंकर मिश्रा को उसके किराए के मकान पर लेकर गई। वहां पुलिस ने गहन तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कई महत्वपूर्ण और संदिग्ध दस्तावेज (documents) बरामद किए गए हैं। सबूतों को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने उसके घर पर लगे सीसीटीवी (CCTV) का डीवीआर (DVR) भी अपने कब्जे में ले लिया है। इसके अलावा, पुलिस ने रमाशंकर के पिता, भाई और फोटोग्राफी का काम करने वाले उसके एक बेहद करीबी दोस्त से भी घंटों पूछताछ की है। साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो, इसलिए पुलिस ने रमाशंकर के कमरे को पूरी तरह सील कर दिया है।
‘सोचा नहीं था कि पाप का घड़ा फूटेगा’: पुलिस के सामने रो पड़ा रमाशंकर
सूत्रों से मिली बेहद पुख्ता जानकारी के मुताबिक, लगातार हुई सख्त पूछताछ के आगे रमाशंकर मिश्रा ज्यादा देर टिक नहीं सका और पुलिस के सामने फूट-फूटकर रोने लगा। उसने इस पूरे चंदा चोरी रैकेट के पीछे के मास्टरमाइंड अनुकल्प मिश्रा का नाम लेते हुए कबूल किया कि वे सभी मिलकर काफी समय से मंदिर के चढ़ावे पर हाथ साफ कर रहे थे।
रमाशंकर ने पुलिस अधिकारियों के सामने बेबसी जताते हुए कहा, “मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हमारा यह राज इस तरह सबके सामने उजागर हो जाएगा।” गौरतलब है कि पुलिस पहले ही रमाशंकर के पास से 7 लाख 32 हजार रुपये की नगदी, चांदी के भारी मात्रा में सिक्के और कीमती सोने-चांदी के आभूषण बरामद कर चुकी है। पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि चोरी किए गए चंदे के पैसों को उसने जमीन (रियल एस्टेट) खरीदने में इन्वेस्ट किया था।
रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव पर शिकंजा, बरामदगी की कोशिशें तेज
दूसरी तरफ, मामले के सह-आरोपी और रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव से भी पुलिस ने बुधवार को मैराथन पूछताछ की। हालांकि, रमाशंकर की तरह सुभाष श्रीवास्तव की निशानदेही पर फिलहाल पुलिस को कोई भौतिक बरामदगी नहीं हुई है और न ही पुलिस उसे किसी गुप्त लोकेशन पर लेकर गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सुभाष द्वारा दिए गए बयानों और तथ्यों का बारीकी से सत्यापन (verification) किया जा रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही उसके बैंक खातों और अघोषित संपत्तियों की भी जांच की जाएगी ताकि चोरी की रकम का पता लगाया जा सके।
चढ़ावा गिनने वाले और ढोने वाले ही निकले ‘विभीषण’
इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात इन आरोपियों की मंदिर में भूमिका को लेकर है। आरोपी सुभाष श्रीवास्तव एक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी है, जिसे उसकी विशेषज्ञता के कारण राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दान में आने वाली नगदी की गिनती की देखरेख (सुपरविजन) करने के काम पर लगाया गया था।
वहीं, दूसरा आरोपी रमाशंकर मिश्रा पिछले 5 सालों से राम मंदिर में कार्यरत था। शुरुआत में वह मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं की तस्वीरें खींचकर अपनी आजीविका चलाता था, लेकिन बाद में उसका भरोसा जीतकर उसे दानपात्र से चढ़ावे की रकम को निकालकर सुरक्षित काउंटिंग रूम (गिनती कक्ष) तक पहुंचाने की बेहद संवेदनशील जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। इसी भरोसे का फायदा उठाकर इन दोनों ने मिलकर आस्था के सबसे बड़े केंद्र में चोरी की इस शर्मनाक वारदात को अंजाम दिया।













