नई दिल्ली: भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के विरोध में देश भर के किसान संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। दिल्ली के ऐतिहासिक किसान घाट पर विशाल ‘महापंचायत’ के आह्वान के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने दिल्ली, जालंधर और जम्मू नेशनल हाईवे को पूरी तरह सील कर दिया है, जबकि पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर दिल्ली कूच कर रहे हजारों किसानों को रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
पंजाब, हरियाणा व यूपी से दिल्ली कूच कर रहे किसान; शंभू बॉर्डर पर बैरिकेडिंग
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों से किसान और सामाजिक संगठन दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि जगह-जगह नाकेबंदी कर शांतिपूर्ण ढंग से आ रहे किसानों को रोका जा रहा है, जो उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।
हाल ही में किसान मजदूर मोर्चा ने भी इस ट्रेड डील के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतले दहन किए थे।
क्या है भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विवाद? किसान vs सरकार का पक्ष
किसान संगठन लंबे समय से भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम कृषि समझौते का विरोध कर रहे हैं।
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किसानों का तर्क: किसान संगठनों का कहना है कि इस समझौते से देश के कृषि क्षेत्र और छोटे किसानों पर विनाशकारी असर पड़ेगा। सरकार ने अमेरिका के बड़े एग्रो-कॉर्पोरेट्स के आगे भारतीय किसानों के हितों से समझौता कर लिया है।
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सरकार का दावा: सरकार का कहना है कि देश के संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर (सुरक्षित) रखा गया है। इसमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय (Safety Measures) शामिल हैं, जिससे घरेलू किसानों को कोई नुकसान नहीं होगा।
सस्ते अमेरिकी उत्पादों की डंपिंग का डर, डेयरी व छोटे किसानों पर मंडराया संकट
अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले ने इस डील की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी (टैरिफ) को भारी घटाया गया है।
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टैरिफ में बड़ी कटौती: जिन अमेरिकी उत्पादों पर पहले 35% से लेकर 150% तक आयात शुल्क लगता था, उसे घटाकर शून्य (0%) कर दिया गया है। इसके अलावा अन्य स्थानीय करों को भी हटा दिया गया है।
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अनुचित प्रतिस्पर्धा: अमेरिका और यूरोपीय संघ में किसानों को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत में ज्यादातर किसान छोटे व सीमांत (कम भूमि वाले) हैं। शून्य टैरिफ के बाद सस्ते अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में डंप होंगे, जिससे स्थानीय फसलों के दाम गिर जाएंगे और करोड़ों किसानों की आजीविका छीन जाएगी।
किसान नेताओं का आरोप है कि यह समझौता पूरी तरह से गुप्त तरीके से किया गया और इसमें भारतीय किसानों या मुख्य हितधारकों (Stakeholders) से कोई परामर्श नहीं लिया गया।














