क्या E20 पेट्रोल से घटता है माइलेज और खराब होता है इंजन? संसद में नितिन गडकरी ने दिया यह जवाब

नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों के मन में उठ रहे तमाम सवालों, माइलेज में गिरावट की आशंकाओं और पुराने वाहनों के इंजन पर पड़ने वाले असर को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद (राज्यसभा) में पूछे गए सवालों का लिखित जवाब देते हुए कहा कि अब तक किए गए व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों में E20 पेट्रोल से वाहनों की परफॉर्मेंस या इंजन की टिकाऊ क्षमता पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं पाया गया है।

क्या E20 से घट जाता है गाड़ियों का माइलेज?

माइलेज कम होने की आशंकाओं पर विराम लगाते हुए नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि किसी भी वाहन का माइलेज केवल ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता है। गाड़ी का माइलेज आपकी ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, ट्रैफिक, समय पर वाहन की मेंटेनेंस और इंजन की ओवरऑल कंडीशन जैसे कई महत्वपूर्ण कारकों से तय होता है। इसलिए सिर्फ E20 पेट्रोल को माइलेज में कमी की मुख्य वजह नहीं माना जा सकता।

पुराने (Legacy) वाहनों के इंजन पर क्या होगा असर?

पुराने वाहनों में E20 ईंधन के इस्तेमाल को लेकर सरकार ने विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट के आंकड़े पेश किए। नितिन गडकरी ने बताया कि इंडियन ऑयल (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने मिलकर दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर संयुक्त स्टडी की है।

अध्ययन के मुताबिक, पुराने वाहनों की परफॉर्मेंस में कोई बड़ी गिरावट नहीं दर्ज की गई और न ही इंजन के पार्ट्स में कोई असामान्य घिसावट (Wear and Tear) पाई गई। स्टार्ट होने की क्षमता, ड्राइवेबिलिटी और प्लास्टिक या मेटल पार्ट्स की अनुकूलता जांच में सभी वाहन खरे उतरे हैं।

क्या पुराने वाहनों में कराना होगा इंजन मॉडिफिकेशन?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के लिए कार या बाइक के इंजन में किसी भी तरह के बड़े मॉडिफिकेशन (बदलाव) की जरूरत नहीं पाई गई है। हालांकि, अप्रैल 2005 से लागू BS-III मानकों वाले और 2016 से पहले निर्मित कुछ वाहनों में रबर पार्ट्स या गैस्केट बदलने की आवश्यकता हो सकती है। यह बदलाव सामान्य सर्विसिंग के दौरान बहुत आसानी से कराया जा सकता है।

NITI आयोग की समिति और 100 साल पुराना वैश्विक इतिहास

गडकरी ने राज्यसभा में बताया कि 26 दिसंबर 2020 को नीति आयोग के तहत बनी अंतर-मंत्रालयी समिति की सिफारिशों के आधार पर जून 2021 में ‘रोडमैप फॉर इथेनॉल ब्लेंडिंग इन इंडिया 2020-25’ जारी किया गया था।

वैश्विक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर में पेट्रोल में इथेनॉल ब्लेंडिंग का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है। ब्राजील जैसे देश कई दशकों से E20 से भी अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का सफलता से इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत में 2001 में पायलट प्रोजेक्ट के बाद 2006 में E5 पेट्रोल की शुरुआत हुई थी और अब व्यापक लैब टेस्ट व फील्ड ट्रायल के बाद ही E20 को आगे बढ़ाया गया है।

 

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