
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र से एक सनसनीखेज और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां मोबाइल की किस्त वसूलने के बहाने नवल नाम के एक युवक को बंधक बनाकर उसके हाथ से सिरिंज द्वारा खून निकाला गया। डीसीपी की कड़ी फटकार और सख्त रुख के बाद सोमवार शाम निगोहां पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर पीड़ित का चिकित्सकीय परीक्षण (मेडिकल) कराया। पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस ने शुरुआती जांच में युवक के हाथ से खून निकाले जाने की पुष्टि कर दी है।
फरार आरोपी ने खून बेचने की कही थी बात, पुलिस की 3 टीमें दे रही दबिश
डीसीपी दक्षिणी मो. मुश्ताक के अनुसार, हिरासत में लिए गए दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। उन्होंने पुलिस को दिए बयान में बताया कि उनके फरार साथी ने निकाला गया खून बेचने की बात कही थी, लेकिन वह खून कहां और किसे बेचने वाला था, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। पुलिस अब इसी एंगल पर जांच आगे बढ़ा रही है कि क्या इसके पीछे कोई अवैध ब्लड रैकेट काम कर रहा है। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की 3 विशेष टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।
मोबाइल shop संचालक और फाइनेंस एजेंटों से पूछताछ
घटना की पड़ताल के सिलसिले में मंगलवार को पुलिस ने निगोहां कस्बे की ‘गीता मोबाइल शॉप’ के संचालक शिवम को थाने बुलाकर घंटों पूछताछ की। इसके अलावा इलाके की अन्य मोबाइल दुकानों से जुड़े प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों के रिकवरी एजेंटों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पीड़ित नवल की मोबाइल किस्त की वसूली किस कंपनी और किन एजेंटों के हवाले थी। हालांकि, सोमवार रात मुख्य आरोपी से फोन पर संपर्क हुआ था, लेकिन जल्द ही उसने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया।
दुकानदार ने वसूली से झाड़ा पल्ला
पूछताछ के दौरान दुकान संचालक शिवम ने वसूली के इस खौफनाक तरीके से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है। उसने पुलिस को बताया कि उसकी दुकान का काम सिर्फ ग्राहकों को मोबाइल बेचना है। फाइनेंस प्रक्रिया पूरी होते ही संबंधित कंपनी दुकान को भुगतान कर देती है। इसके बाद रिकवरी की पूरी जिम्मेदारी फाइनेंस कंपनी के अधिकृत एजेंटों की होती है और इस प्रक्रिया से दुकान का कोई लेना-देना नहीं है।










