महाराष्ट्र के ठाणे में ताश के पत्तों की तरह ढही चार मंजिला इमारत: 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत, मलबे से सुरक्षित निकाली गई मासूम बच्ची, NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

महाराष्ट्र के ठाणे जिले में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाला बड़ा हादसा सामने आया है। भिवंडी के नारपोली स्थित भंडारी कंपाउंड की चार मंजिला ‘कोहिनूर इमारत’ का एक बड़ा हिस्सा अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर ढह गया। इस भीषण हादसे में अब तक 6 मजदूरों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोगों के अभी भी मलबे के नीचे दबे होने की आशंका है। घटना के बाद से पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, भिवंडी-निज़ामपुर शहर नगर निगम (BNCMC) की टीम और एनडीआरएफ (NDRF) के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे और राहत बचाव कार्य शुरू किया।

सी-कैटेगरी घोषित हो चुकी थी इमारत, फिर भी नीचे चल रहा था काम

घटना की जानकारी देते हुए भिवंडी पश्चिम के स्थानीय विधायक महेश चौगुले ने बताया कि यह दुर्घटना नारपोली स्थित जर्जर कोहिनूर इमारत में हुई है। नगर निगम प्रशासन ने इस इमारत की जर्जर स्थिति को देखते हुए इसे बहुत पहले ही ‘सी-कैटेगरी’ (अति-खतरनाक एवं जर्जर) घोषित कर दिया था और एहतियातन इसे पूरी तरह खाली करा लिया गया था। हालांकि, इमारत खाली होने के बावजूद इसके निचले हिस्से में कुछ मजदूर काम कर रहे थे। शुरुआती जांच और आशंकाओं के मुताबिक, काम के दौरान इमारत के एक साथ तीन पिलरों को तोड़े जाने के कारण पूरी बिल्डिंग का संतुलन बिगड़ गया और बी-विंग का बड़ा हिस्सा देखते ही देखते जमींदोज हो गया।

NDRF की त्वरित कार्रवाई: मलबे में फंसी बच्ची को मिला नया जीवन

हादसे की खबर मिलते ही NDRF की टीम ने कटर और भारी जेसीबी मशीनों की मदद से मलबे को हटाने और फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। मलबे से अब तक 6 शव निकाले जा चुके हैं, जिनमें से देवजी नगर के रहने वाले 32 वर्षीय शमीम शेख के शव की शिनाख्त हो चुकी है, जबकि अन्य दो शवों को बाहर निकालने के प्रयास तेजी से जारी हैं। राहत की बात यह रही कि बचाव दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मलबे के नीचे दबी एक मासूम बच्ची समेत तीन लोगों को जिंदा बाहर निकाल लिया। सुरक्षित बचाई गई बच्ची ने बताया कि हादसा होते ही उसके माता-पिता किसी तरह जान बचाकर बाहर भागने में सफल रहे, लेकिन वह वहीं फंस गई थी, जिसे बाद में रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित बचा लिया।

मौके पर भारी अमला मौजूद, अंतिम व्यक्ति के निकलने तक जारी रहेगा अभियान

फिलहाल NDRF, फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस बल संयुक्त रूप से मौके पर डटे हुए हैं। मलबे के भीतर ऑक्सीजन की उपलब्धता और दबे हुए अन्य मजदूरों की तलाश के लिए आधुनिक उपकरणों और डॉग स्क्वायड की मदद भी ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक मलबे में दबे आखिरी व्यक्ति को बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक राहत और बचाव अभियान लगातार जारी रहेगा। इस हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठ रहे हैं कि अति-जर्जर घोषित होने के बावजूद इमारत में काम करने की अनुमति कैसे दी गई थी।

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