पेपर लीक और नकल माफिया पर कसा शिकंजा: ‘लोक परीक्षा संशोधन कानून 2026’ को मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, जानिए कितनी सख्त होगी सजा

देशभर में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और नकल माफिया की कमर तोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन अधिनियम, 2026’ को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह नया संशोधन विधेयक अब पूरे देश में कानून के रूप में लागू हो चुका है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाले पेपर लीक, नकल और हर तरह की धांधली पर पूर्ण विराम लगाना है। संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति भवन भेजा गया था।

UPSC, SSC और NTA जैसी बड़ी परीक्षाएं दायरे में शामिल

राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही इस कानून ने पुराने ‘लोक परीक्षा अधिनियम’ की जगह ले ली है और इसमें कई कड़े संशोधन शामिल किए गए हैं। नए कानून के दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) समेत केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की सभी भर्ती व प्रवेश परीक्षाएं शामिल होंगी। सरकार का मानना है कि इस सख्त कदम से दिन-रात मेहनत कर रहे लाखों अभ्यर्थियों का व्यवस्था पर भरोसा फिर से बहाल होगा।

कोचिंग संस्थानों और सर्विस प्रोवाइडर पर कसेगा शिकंजा, तय हुई भारी सजा

नए संशोधन अधिनियम के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली कराने वाले संगठित गिरोहों, सांठ-गांठ करने वाले कोचिंग संस्थानों और परीक्षा आयोजित कराने वाले सर्विस प्रोवाइडर्स पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गलत साधनों और नकल का सहारा लेने वाले समूहों के लिए सख्त जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की तकनीकी सेंधमारी, हैकिंग या अंदरूनी मिलीभगत को रोकने के लिए जांच एजेंसियों को पहले से ज्यादा अधिकार और शक्तियां दी गई हैं।

लाखों युवाओं के भविष्य को मिलेगी सुरक्षा और भरोसा

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में देश की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं और नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने से लाखों अभ्यर्थियों को भारी मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी थी। कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं, जिससे युवाओं का समय बर्बाद हुआ। अब इस नए कड़े कानून के अस्तित्व में आने से न केवल अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षा मिलेगी, बल्कि सभी प्रतियोगी परीक्षाएं निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से आयोजित कराई जा सकेंगी।

 

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