परिसीमन और FCRA के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा में प्रस्ताव पास, DMK ने किया समर्थन

 

चेन्नई। तमिलनाडु की सी. जोसेफ विजय सरकार ने दो दिनों के भीतर केंद्र सरकार की दो प्रमुख योजनाओं परिसीमन और FCRA के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित किए हैं। बुधवार (12 अगस्त) को मुख्यमंत्री विजय ने खुद विधानसभा में परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। इससे पहले मंगलवार को FCRA बिल के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया गया था। खास बात यह रही कि परिसीमन और FCRA के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों का एमके स्टालिन की पार्टी DMK ने समर्थन किया। परिसीमन और FCRA के खिलाफ इस तरह का कदम उठाने वाला तमिलनाडु पहला राज्य है।

परिसीमन के खिलाफ पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार से लोकसभा सदस्यों की संख्या 543 पर निर्धारित रखने की अपील की गई है। इस मुद्दे पर विधानसभा में करीब दो घंटे तक तीखी बहस चली, जिसके बाद प्रस्ताव को सदन की मंजूरी मिल गई।

क्या बोले उदयनिधि स्टालिन?

DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि पार्टी का रुख है कि अगले 25 वर्षों तक निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण पर प्रस्ताव का स्वागत किया। उदयनिधि ने कहा कि जिस आंदोलन ने सबसे पहले भारत को बताया कि परिसीमन का प्रभाव क्या होगा, वह DMK है।

इसके बाद TVK की ओर से DMK को धन्यवाद दिया गया। विधानसभा में तमिलनाडु के मंत्री आधव अर्जुन ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए DMK का धन्यवाद करते हैं।

DMK का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक ऐसी खबरें सामने आ रही थीं कि पार्टी परिसीमन बिल पर केंद्र सरकार का समर्थन कर सकती है। हालांकि, विधानसभा में DMK ने इस मुद्दे पर अलग रुख अपनाया है।

सीएम विजय ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री विजय ने कहा, ”परिसीमन की वजह से महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण में और देरी नहीं होनी चाहिए।” प्रस्ताव में कहा गया है कि यह सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम लागू किए हैं, उन पर परिसीमन प्रस्ताव का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

तमिलनाडु से कांग्रेस के सांसद पी. चिदंबरम ने कहा कि परिसीमन का विरोध करने वाला प्रस्ताव पास करना सही कदम है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के अकेले सदस्य को छोड़कर पूरा तमिलनाडु इस मामले पर एकमत है। लोकसभा की सीटों की संख्या 543 पर ही रखी जानी चाहिए, वरना यह चीन की संसद जैसी हो जाएगी और सिर्फ एक जनसभा बनकर रह जाएगी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों का अनुपात स्थिर रखा जाना चाहिए और पिछले 25 वर्षों से परिवार नियोजन लागू करने के लिए उन्हें सजा नहीं दी जा सकती।

FCRA बिल पर पी. चिदंबरम ने कहा, “उन्हें न सिर्फ़ इसे JPC के पास भेजना चाहिए, बल्कि बिल वापस भी ले लेना चाहिए। कम से कम, हंगामे के बीच बिल पास करने से तो यह बेहतर ही है। कांग्रेस JPC में बिल का विरोध करेगी और आखिरकार इस बिल को रद्द करना ही होगा। यह एक शरारतपूर्ण बिल है जिसका मकसद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना है।”

FCRA पर भी विधानसभा में प्रस्ताव

इससे पहले मंगलवार को विजय सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव का भी DMK ने समर्थन किया। स्कूल शिक्षा मंत्री राजमोहन ने प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि इस संशोधन से परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता, विशेष रूप से अल्पसंख्यकों के माध्यम से चलाए जा रहे शैक्षणिक और समाज कल्याण संस्थानों के कामकाज पर असर पड़ सकता है।

मोदी सरकार मौजूदा मानसून सत्र में FCRA बिल को पास कराने की योजना में थी, लेकिन विपक्षी दलों और ईसाई संगठनों के विरोध के बीच इस फैसले को टाल दिया गया। सरकार ने विधेयक को संसदीय समिति यानी JPC के पास भेज दिया है।

NEET के खिलाफ भी प्रस्ताव पास

TVK सरकार ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया। NEET पर पारित प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस परीक्षा को समाप्त करने की मांग की गई है। साथ ही 12वीं कक्षा के अंकों के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश देने का आग्रह किया गया है।

इस प्रस्ताव का DMK, अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK), पट्टाली मक्कल काची (PMK) और वामपंथी दलों के सदस्यों ने भी समर्थन किया। बीजेपी विधायक भोजराजन ने प्रस्ताव का विरोध किया और सदन से वॉकआउट किया।

तमिलनाडु में लंबे समय से NEET परीक्षा को खत्म करने की मांग उठती रही है। NEET परीक्षा में धांधली के बाद यह मांग और तेज हो गई थी। इसी बीच विजय सरकार ने परिसीमन, FCRA और NEET के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार के सामने अपना रुख स्पष्ट किया है।

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