FCRA विधेयक JPC को भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पास, विपक्ष ने उठाए सवाल; किरण रिजिजू बोले- कांग्रेस देश को गुमराह कर रही

 

नई दिल्ली। FCRA (Foreign Contribution Regulation Amendment) Bill, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में भेजे जाने का प्रस्ताव बुधवार को लोकसभा में पास हो गया। इस प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में पेश किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने विधेयक को वापस लेने की मांग की है। पिछले काफी दिनों से FCRA विधेयक को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा जारी है। केंद्र सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस इस विधेयक को लेकर देश को गुमराह कर रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस मामले में ईसाई संगठनों को भरोसा दिया है कि FCRA विधेयक किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है और यह पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष है। इस मुद्दे को लेकर ईसाई संगठनों के नेता अमित शाह से भी मिले थे। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने कहा था कि अगर सरकार विधेयक को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है तो इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा जाना चाहिए।

FCRA विधेयक, 2026 को इस साल 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों के हंगामे के कारण यह पारित नहीं हो सका था। अब विधेयक को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव लोकसभा में पास होने के बाद इसके प्रावधानों पर समिति में विस्तार से विचार किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।

विधेयक का विरोध कर रहे विपक्षी दलों का आरोप है कि यह अल्पसंख्यकों पर हमला है। विपक्ष का कहना है कि विधेयक के कुछ प्रावधान एनजीओ और अल्पसंख्यकों के लिए संचालित सामाजिक कल्याण एवं शैक्षणिक संस्थानों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को प्रभावित कर सकते हैं। इसी को लेकर विपक्ष लगातार सरकार से विधेयक वापस लेने की मांग कर रहा है।

वहीं, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने दावा किया कि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA Bill) में सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन शायद पेश ही न हो। इस पूरे मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं और अब सभी की नजर संयुक्त संसदीय समिति में विधेयक पर होने वाली चर्चा और आगे की प्रक्रिया पर है।

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