
नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम अंतरिम आदेश में कहा है कि 14 साल से कम उम्र के बच्चे को दिल्ली स्कूल शिक्षा नियमों के तहत स्कूल से नहीं निकाला जा सकता। अदालत ने दिल्ली पब्लिक स्कूल को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की 13 साल 6 महीने की छात्रा को आठवीं कक्षा की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति देने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह आदेश नाबालिग छात्रा की ओर से उसकी मां के माध्यम से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। छात्रा ने स्कूल से अनुपस्थित रहने और एक परीक्षा में शामिल नहीं होने के बाद उसके खिलाफ की गई कार्रवाई को चुनौती दी थी।
2016 से स्कूल में पढ़ रही है छात्रा
याचिका में बताया गया कि छात्रा वर्ष 2016 से स्कूल में पढ़ रही है और वर्तमान में आठवीं कक्षा की छात्रा है। छात्रा के अनुसार, वह छह जुलाई को स्कूल नहीं गई थी और उस दिन होने वाली परीक्षा में भी शामिल नहीं हो सकी थी।
छात्रा ने अदालत को बताया कि 11वीं कक्षा में पढ़ने वाले दो छात्रों ने उसे उस दिन स्कूल नहीं जाने और परीक्षा में शामिल न होने के लिए मना लिया था। इसके बाद स्कूल की ओर से उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
14 साल या उससे अधिक उम्र के छात्रों पर लागू प्रावधान
मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली स्कूल शिक्षा नियमों के नियम 37(1)(बी) का उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इस प्रावधान में जुर्माना, स्कूल से निष्कासन और निलंबन जैसे अनुशासनात्मक कदम 14 साल या उससे अधिक उम्र के छात्रों के संबंध में निर्धारित किए गए हैं।
अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की उम्र फिलहाल 13 साल 6 महीने है। ऐसे में कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि छात्रा के खिलाफ स्कूल की ओर से की गई कार्रवाई नियमों में निर्धारित स्पष्ट शर्तों के अनुरूप नहीं थी।
आठवीं की पढ़ाई जारी रखने की अनुमति
अदालत ने मामले के तथ्यों और छात्रा की उम्र को देखते हुए दिल्ली पब्लिक स्कूल को निर्देश दिया कि छात्रा को आठवीं कक्षा की पढ़ाई जारी रखने दी जाए। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश से छात्रा को राहत मिली है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल छात्रा की शिक्षा जारी रखने का रास्ता साफ कर दिया है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान स्कूल की कार्रवाई और अन्य संबंधित पहलुओं पर अदालत का अंतिम रुख सामने आएगा।












