कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के चौबेपुर थाना क्षेत्र से कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। यहां हत्या के मामले में वांछित एक वारंटी को पकड़ने गई सचेंडी थाने की पुलिस टीम को ग्रामीणों और परिजनों ने घेर लिया। आरोप है कि पुलिस के साथ हाथापाई कर आरोपी को जबरन छुड़ा लिया गया। बाद में चौबेपुर थाने से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और सचेंडी पुलिस टीम को सुरक्षित बाहर निकाला, जिसके बाद वारंटी को दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया।
बहन के घर छिपा था हत्या के मामले का वारंटी
सचेंडी थाना क्षेत्र के रहने वाले सुमित शुक्ला के खिलाफ हत्या के एक मामले में न्यायालय से वारंट जारी किया गया था। सचेंडी पुलिस काफी समय से उसकी तलाश में जुटी हुई थी। इस बीच पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि आरोपी सुमित चौबेपुर थाना क्षेत्र के गुरैया गांव में अपनी बहन के घर पर शरण लिए हुए है और वहीं छिपा रह रहा है। इसी सूचना के आधार पर सचेंडी पुलिस ने कार्रवाई की योजना बनाई।
दबिश के दौरान ग्रामीणों और परिजनों ने पुलिस को घेरा
शनिवार दोपहर सचेंडी थाने के दरोगा देवेंद्र सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ गुरैया गांव पहुंचे और दबिश देकर सुमित शुक्ला को धर दबोचा। पुलिस टीम जब आरोपी को पकड़कर अपनी गाड़ी में बैठा रही थी, तभी सुमित की बहन, बहनोई, अन्य परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया।
आरोप है कि ग्रामीणों ने पुलिसकर्मियों के साथ तीखी नोकझोंक और हाथापाई शुरू कर दी। इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर भीड़ ने पुलिस हिरासत से वारंटी सुमित शुक्ला को जबरन छुड़ाकर भगा दिया। ग्रामीणों के बीच घिरने के बाद सचेंडी पुलिस टीम के होश उड़ गए और उन्होंने तुरंत अपने उच्चाधिकारियों तथा स्थानीय चौबेपुर थाने को घटना की जानकारी दी।
चौबेपुर पुलिस ने पहुंचकर टीम को छुड़ाया, दोबारा हुई गिरफ्तारी
सूचना मिलते ही चौबेपुर थाना प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ तुरंत गुरैया गांव पहुंचे और मोर्चा संभाला। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद ग्रामीणों के चंगुल से सचेंडी थाने की टीम को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद पुलिस बल ने दोबारा दबिश देकर फरार हुए वारंटी सुमित शुक्ला को धर दबोचा और उसे सचेंडी पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
चौबेपुर के थाना प्रभारी दुर्गेश मिश्रा ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि सचेंडी पुलिस ने चौबेपुर थाने को बिना किसी पूर्व सूचना या स्थानीय सहयोग के अपने स्तर पर गांव में दबिश दी थी, जिसके चलते यह स्थिति पैदा हुई और ग्रामीणों ने वारंटी को छुड़ा लिया। उन्होंने बताया कि सचेंडी थाने के दरोगा देवेंद्र सिंह की ओर से अभी लिखित तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बिना सूचना दबिश बनी विवाद की वजह
इस पूरी घटना ने एक बार फिर से अंतर-थानीय समन्वय और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि सचेंडी पुलिस स्थानीय चौबेपुर थाने को भरोसे में लेकर या पर्याप्त फोर्स के साथ दबिश देती, तो शायद इस तरह का विरोध और अप्रिय स्थिति से बचा जा सकता था। फिलहाल मुख्य आरोपी दोबारा पुलिस की गिरफ्त में है और पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया में जुटी हुई है।













