नेपाल में बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर साइट्स पर संकट, 573 मजदूर लापता ; हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू जारी

 

काठमांडू। नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले सैकड़ों मजदूरों को लेकर चिंता बढ़ गई है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और सुरंगों में काम कर रहे कम से कम 573 मजदूरों के लापता या फंसे होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ के कारण कई सुरंगों के रास्ते भारी मलबे से बंद हो गए हैं, जिससे बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं।

बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने रसुवा और नुवाकोट समेत आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचाई। तेज बहाव के साथ बर्फ, चट्टान और भारी मलबा आने से लहेंडे-भोटे कोशी-त्रिशूली नदी सिस्टम में पानी का स्तर अचानक बढ़ गया। इसका सीधा असर कई निर्माणाधीन और संचालित हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर पड़ा।

11 प्रोजेक्ट साइट्स पर 934 मजदूर थे लापता

नेपाल सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार देर रात तक 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर 934 मजदूरों के लापता होने की सूचना थी। इनमें से 361 मजदूरों को सुरक्षित निकाल लिया गया या वे खुद किसी तरह बाढ़ प्रभावित इलाकों से बाहर निकलने में सफल रहे। इसके बावजूद 573 मजदूरों का अब तक पता नहीं चल पाया है।

अधिकारियों का मानना है कि लापता लोगों की वास्तविक संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। निर्माणाधीन परियोजनाओं में ऐसे मजदूरों के काम करने की आशंका है, जिनका सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज नहीं है। इन परियोजनाओं में नेपाल के अलावा भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और जर्मनी के नागरिक भी काम करते हैं।

अपर त्रिशूली-1 में सबसे ज्यादा मजदूर लापता

लापता मजदूरों की सबसे बड़ी संख्या अपर त्रिशूली-1 परियोजना में बताई जा रही है। 216 मेगावाट की इस परियोजना में कम से कम 322 लोगों के लापता होने की जानकारी है। वहीं अपर त्रिशूली-3B में 122, अपर त्रिशूली-3A में 43 और रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 44 लोगों के लापता होने की सूचना है।

बाढ़ के बाद कई सुरंगों के प्रवेश और निकास मार्ग मलबे से पूरी तरह बंद हो गए हैं। ऐसे में बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों तक पहुंच बनाना और अंदर फंसे लोगों का पता लगाना है।

‘कुछ ही सेकंड में बदल गई स्थिति’

अपर त्रिशूली-1 में क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर अजय चौधरी बाढ़ से बचने वाले मजदूरों में शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 8:59 बजे पानी की तेज लहर परियोजना स्थल की ओर आई। निर्माणाधीन साइट पर कई सुरंगें हैं। पानी को तेजी से अपनी ओर बढ़ता देखकर मजदूर ऊंची जगहों की ओर भागने लगे।

चौधरी के मुताबिक, कुछ ही सेकंड में हालात इतने खराब हो गए कि कई मजदूरों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का मौका नहीं मिल सका।

सुरंग में 10 से 12 फीट तक जमा हुआ मलबा

अपर त्रिशूली-1 के असिस्टेंट मैनेजर अशोक कुमार मंडल ने बताया कि सुरंग के रास्ते में करीब 10 से 12 फीट ऊंचा कीचड़ और मलबा जमा हो गया था। वह उन करीब 120 मजदूरों में शामिल हैं, जो वहां से निकलने में सफल रहे।

मंडल के मुताबिक, सुरक्षित निकलने के बाद मजदूरों ने करीब दो दिन तक पहाड़ी रास्तों से पैदल सफर किया और नुवाकोट पहुंचे। इसके बाद बस के जरिए उन्हें काठमांडू लाया गया। उन्होंने बताया कि बाढ़ से पहले परियोजना क्षेत्र में बिजली चली गई थी और कुछ ही देर बाद पानी तेजी से बढ़ने लगा।

मंडल ने यह भी बताया कि त्रिशूली नदी के दूसरी तरफ काम कर रहे करीब 35 से 40 मजदूरों को उन्होंने तेज पानी में बहते हुए देखा।

120 मजदूरों ने सात घंटे पैदल किया सफर

बचाए गए करीब 120 मजदूरों ने शुक्रवार दोपहर लगभग दो बजे नुवाकोट की ओर पैदल सफर शुरू किया। करीब सात घंटे पहाड़ी रास्तों पर चलने के बाद रात लगभग 9:30 बजे वे एक टूटे पुल के पास सड़क तक पहुंचे। इसके बाद बस के जरिए उन्हें काठमांडू लाया गया। फिलहाल कई मजदूरों को काठमांडू में बनाए गए शेल्टर में रखा गया है।

15 हेलीकॉप्टर और 84 प्रशिक्षित लोग रेस्क्यू में जुटे

नेपाल सेना ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। नेपाल आर्मी के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल राजा राम बसनेत के अनुसार, अभियान में 15 हेलीकॉप्टर और कम से कम 84 प्रशिक्षित बचावकर्मियों को लगाया गया है। इसके अलावा अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में बड़ी संख्या में अन्य सुरक्षाकर्मी और बचावकर्मी भी तैनात हैं।

सेना कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर एक साथ अभियान चला रही है। एक चीनी कंपनी के भी बचाव अभियान में सहयोग करने की जानकारी सामने आई है।

250 मीटर लंबी सुरंग में छह लोगों की तलाश

नेपाल माउंटेन गाइड एसोसिएशन की टीमें भी सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष तुल गुरुंग के मुताबिक, चिलमे हाइड्रोपावर की 22 मेगावाट परियोजना में करीब 250 मीटर लंबी सुरंग के भीतर छह लोगों के फंसे होने की जानकारी है।

बचाव दल मलबा हटाते हुए सुरंग के करीब 130 मीटर अंदर तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक छहों लोगों का पता नहीं चल पाया है। सुरंग में जमा मलबे की बड़ी दीवार बचाव कार्य में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। अपर त्रिशूली-1 में भी टीमें सुरंगों का सर्वे कर रही हैं।

NDRF की टीम के लिए नेपाल से आधिकारिक अनुरोध नहीं

नेपाल में जारी बचाव अभियान के बीच भारत की ओर से भी मदद की तैयारी है। हालांकि, अभी तक नेपाल सरकार ने NDRF की टीम भेजने के लिए भारत से आधिकारिक अनुरोध नहीं किया है। NDRF अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने टीम को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।

भारत इससे पहले भी नेपाल में प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत और बचाव अभियान में मदद कर चुका है। वर्ष 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी NDRF की टीमों ने वहां बड़े स्तर पर बचाव और राहत कार्य किया था।

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है। भारी मलबे और बंद सुरंगों के कारण चुनौती बड़ी है। लापता मजदूरों के परिवारों की नजर अब बचाव दलों पर टिकी है और उम्मीद की जा रही है कि सुरंगों तक पहुंच बनाकर अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा।

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