यूपी में 41 फर्जी डॉक्टरों पर FIR, आठ दिन बाद हुई कार्रवाई; अब बोर्ड के अफसर-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में पंजीयन कराने वाले 41 लोगों के खिलाफ आखिरकार एफआईआर दर्ज कर ली गई है। तहरीर मिलने के करीब आठ दिन बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की है। अब इस पूरे मामले की जांच की आंच बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों तक भी पहुंचने की संभावना है।

बताया गया है कि इन 41 लोगों ने कथित तौर पर फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए बोर्ड में पंजीयन कराया और डॉक्टर बनकर मरीजों का उपचार कर रहे थे। अप्रैल 2025 में हुई जांच के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था। इसके बावजूद मामले में लंबे समय तक रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी।

फर्जी प्रमाण पत्रों से कराया था पंजीयन

आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बी चिकित्सा पद्धति बोर्ड में 41 लोगों के फर्जी तरीके से पंजीयन कराने का मामला सामने आया था। जांच में इनके प्रमाण पत्रों को संदिग्ध पाया गया। आरोप है कि पंजीयन कराने के बाद ये लोग लगातार मरीजों का उपचार कर रहे थे।

मामले को मीडिया में उठाए जाने के बाद बोर्ड स्तर पर कार्रवाई तेज हुई। पिछले शनिवार को बोर्ड के अधिकारियों की ओर से संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर दी गई थी।

डीसीपी ने तहरीर हुसैनगंज थाने भेजी

तहरीर मिलने के बाद डीसीपी मध्य विक्रांतवीर ने मामले को हुसैनगंज थाने भेज दिया। पुलिस ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और पत्रावलियों की जांच शुरू की। पुलिस टीम ने बोर्ड कार्यालय पहुंचकर कुछ जरूरी दस्तावेज भी हासिल किए।

पत्रावलियों की पड़ताल के बाद पुलिस ने रविवार को हुसैनगंज थाने में 41 फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

हुसैनगंज थाने के एसओ शिवमंगल सिंह ने बताया कि पत्रावलियों की जांच करने के बाद रिपोर्ट डीसीपी को भेज दी गई थी। इसके बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस पूरे मामले में अब बोर्ड के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की तैयारी है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर इन लोगों का पंजीयन किस तरह हुआ और संबंधित दस्तावेजों की जांच के दौरान अनियमितता कैसे सामने नहीं आई।

मामले में यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

अप्रैल 2025 की जांच में हुआ था खुलासा

बताया गया है कि अप्रैल 2025 में हुई जांच के दौरान 41 लोगों के फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए पंजीयन कराने का मामला सामने आया था। इसके बाद भी उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई थी। अब पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच का रास्ता साफ हो गया है।

फिलहाल पुलिस दर्ज एफआईआर के आधार पर दस्तावेजों की जांच और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों को जुटाने में लगी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि फर्जी पंजीयन कराने वाले लोगों के अलावा इस प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति, अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं।

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