
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान की रकम में कथित हेराफेरी के आरोपों के बाद शुरू हुआ विवाद अब मंदिर प्रबंधन में बड़े प्रशासनिक बदलाव तक पहुंच गया है। मामले में विशेष जांच दल (SIT) का गठन, आठ आरोपियों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद अब मंदिर के दैनिक और प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को सौंपने का फैसला किया गया है।
भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को मंदिर का नया CEO नियुक्त किया गया है। सैन्य पृष्ठभूमि वाले अनुभवी अधिकारी को यह जिम्मेदारी मिलने के बाद मंदिर प्रबंधन में अनुशासन, सुरक्षा और वित्तीय पारदर्शिता पर विशेष जोर दिए जाने की उम्मीद है।
नकदी बरामदगी और वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद
मामला 4 जून को उस समय सामने आया, जब मंदिर परिसर में चढ़ावे की नियमित गिनती के दौरान कुछ संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। जांच के दौरान एक कर्मचारी के घर से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई।
इसके अगले दिन 5 जून को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें बाद में आरोपी बनाए गए एक गणना कर्मी को कथित तौर पर भारी बैग ले जाते हुए देखा गया। 7 जून को मामला उस समय और बड़ा हो गया, जब एक प्रमुख राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मंदिर के चढ़ावे में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाए।
शुरुआत में ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव ने आंतरिक जांच का हवाला देते हुए आरोपों को खारिज किया, लेकिन नकदी बरामदगी और वायरल वीडियो के बाद विवाद लगातार बढ़ता गया।
13 जून को गठित हुई तीन सदस्यीय SIT
मामले के बढ़ने के बाद ट्रस्ट के अनुरोध पर 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल का गठन किया गया। SIT ने मंदिर में दान पेटी खोलने से लेकर नोटों की गिनती, CCTV फुटेज, कर्मचारियों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की।
23 जून को टीम ने अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में गणना प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया। साथ ही चढ़ावे की रकम से छेड़छाड़ के साक्ष्य मिलने के आधार पर कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई।
FIR के बाद आठ गिरफ्तारियां, दो पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
SIT की रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को ट्रस्ट के एक सदस्य की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। इसमें चोरी, गबन, आपराधिक विश्वासघात और साजिश जैसी धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई। इसके बाद पुलिस ने मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
गिरफ्तारियों और जांच रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे। इसके एक दिन बाद 26 जून को तत्कालीन महासचिव और एक अन्य वरिष्ठ ट्रस्टी ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
प्रशासनिक व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव
6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में दोनों इस्तीफे स्वीकार किए गए। एक ट्रस्ट सदस्य को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। इसी बैठक में मंदिर के दैनिक और प्रशासनिक कामकाज के लिए एक पेशेवर CEO नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।
इसके लिए चयन समिति बनाई गई। 22 जुलाई की बैठक में CCTV सर्विलांस, बैंक के साथ हुए समझौते (MoU) और धार्मिक समिति के पुनर्गठन सहित कई मुद्दों पर चर्चा और फैसले किए गए।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई SIT का गठन भी किया गया। 17 अगस्त को उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने पहली SIT की विस्तृत रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी। इसमें सुरक्षा व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और आधुनिक ऑडिट प्रणाली लागू करने पर जोर दिया गया।
5500 से ज्यादा आवेदन के बाद जीतेंद्र मिश्रा का चयन
CEO पद के लिए आवेदन मांगे जाने के बाद देशभर से 5500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। चयन प्रक्रिया के बाद भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का नया CEO चुना गया।
इसके साथ ही ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नए प्रशासनिक ढांचे के तहत मंदिर के संचालन में सुरक्षा, वित्तीय निगरानी, दान-चढ़ावे के प्रबंधन और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर रहेगा।
चढ़ावे की रकम से जुड़े विवाद के बाद हुए ये बदलाव राम मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़े परिवर्तन के तौर पर देखे जा रहे हैं। अब नई व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की विशाल व्यवस्थाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और जवाबदेह तरीके से संचालित करना होगी।












