
औरैया। देश की राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला PG इमारत ढहने से हुए दर्दनाक हादसे का असर उत्तर प्रदेश के औरैया जिले तक देखने को मिला है। इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले दिबियापुर निवासी इकलौते बेटे पवन कुमार का शव जैसे ही मंगलवार सुबह उसके पैतृक घर पहुंचा, पूरे इलाके में कोहराम मच गया। जिस भाई की कलाई पर अभी हाल ही में चारों बहनों ने रक्षाबंधन पर लंबी उम्र की दुआ मांगते हुए राखी बांधी थी, उसका बेजान शरीर देखते ही बहनें फूट-फूटकर रो पड़ीं, जबकि पिता बदहवास हो गए।
बीएससी कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने दिल्ली गया था पवन
औरैया के दिबियापुर निवासी रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह का इकलौता बेटा पवन बेहद होनहार था। उसने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज दिबियापुर से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। भविष्य में बड़ा मुकाम हासिल करने के सपने के साथ उसने बीते 20 जुलाई को दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में बीएससी कंप्यूटर साइंस (B.Sc Computer Science) में दाखिला लिया था। हालांकि, दिल्ली पहुंचे उसे महज डेढ़ महीना ही हुआ था कि सत्य निकेतन में हुए इस बड़े हादसे ने उसकी जिंदगी छीन ली।

बहन खोजती रही भाई, जन्माष्टमी साथ मनाकर लौटा था दिल्ली
पवन की बहन प्रियांशी भी पिछले साल दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेकर गर्ल्स हॉस्टल में रह रही है। घटना की सूचना मिलते ही वह बदहवास होकर मौके पर पहुंची और काफी देर तक मलबे के पास भाई को ढूंढती रही। देर रात पवन की मौत की पुष्टि होने पर पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिजनों ने बताया कि पवन रक्षाबंधन और जन्माष्टमी का त्योहार मनाने घर आया हुआ था। शनिवार को ही बहनों ने उसे हंसते-मुस्कुराते दिल्ली के लिए विदा किया था। दिल्ली पहुंचने के अगले ही दिन यह खौफनाक हादसा हो गया।
मानसिक रूप से बीमार मां से छिपाई गई मौत की बात
पवन अपनी मां मीरा देवी से रोज सुबह-शाम वीडियो कॉल पर बात किया करता था। रविवार सुबह भी उसने मां से बात की थी, लेकिन शाम को उसका फोन नहीं आया तो परिवार की चिंता बढ़ गई और बाद में हादसे की मनहूस खबर आई। पवन की मां की मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण परिवार ने अभी तक उनसे बेटे की मौत की बात छिपाकर रखी है। पवन का शव घर पहुंचते ही रिश्तेदारों और सांत्वना देने वालों का तांता लग गया है, हर आंख नम है।










